





साबर साधनाओं का इतिहास भी उतना ही पुराना है, जितना वेदोक्त साधनाओं का, हर मनुष्य साहित्य का विद्वान नहीं बन सकता, सम्पूर्ण पूजन विधि का ज्ञान नहीं होता, अपने जीवन में दिन प्रतिदिन की समस्याओं के समाधान के लिए क्या करें? इसका एक ही उत्तर है साबर साधनाएं-जिन्हें भगवान सदा शिव ने स्वयं अपने श्रीमुख से युग-धर्म को देखते हुए सामान्य साधको के लिए उच्चारित किया।
आज यह सिद्ध है कि साबर साधनाओं का प्रभाव तुरन्त और अचूक होता है, आवश्यकता केवल इस बात की है कि पूर्ण श्रद्धा, विश्वास के साथ साधना सम्पन्न की जाये, साधक को गुरु कृपा का आशीर्वाद निरन्तर प्राप्त होता रहे तब तो हिमालय भी उसके सामने छोटा है।
साबर मंत्र समस्त मंत्रों में सर्वश्रेष्ठ, अचूक, प्रभावयुक्त और महत्वपूर्ण माने गये हैं क्योंकि इन मंत्रों के द्वारा जल्दी सफलता और सिद्धि प्राप्त होती है, बन्दूक से निकली गोली का लक्ष्य भले ही चूक जाये परन्तु इन साबर मंत्रों का निशाना अचूक होता है, जिन साधकों में साहस और क्षमता है, जो दृढ़ और हिम्मतवान व्यक्ति होते हैं, वे ही इन साधनाओं में गुरु की आज्ञा से और उनके सानिध्य में भाग लेकर इन साधनाओं से सिद्धि और सफलता प्राप्त करने में सक्षम हो पाते हैं।
साबर मंत्रों के अक्षर सीधे सादे और सरल होते हैं और उनके अर्थ भी ज्यादा स्पष्ट नहीं होते, इनमें तो शब्दों का संयोजन ही प्रमुख होता है, पूरी आस्था और विश्वास के साथ साबर मंत्र सिद्ध किये जायें तो ऐसा सिद्ध व्यक्ति त्रैलोक्य को भी विजय कर सकता है। साबर सिद्धि साधना में साधक की श्रद्धा ही पूर्ण रूप से सहायक होती है, यदि इसके गोपनीय रहस्यों को जानकर उसके अनुसार साधनाएं सम्पन्न की जाये तो निश्चय ही ये सिद्धिदायक होते ही हैं।
साबर साधना मंत्र क्या है? मंत्र तो आत्मा से निकली हुई भाषा है, आवाहन है, जिसे साधक अपनी समस्याओं बाधाओं को दूर करने के लिए, अपने जीवन में निरन्तर श्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए शक्ति को जाग्रत करता है, इसके लिए साधक की भावना प्रबल होना सबसे अधिक आवश्यक है और यही तो साबर साधना का रहस्य है, जहां श्रद्धा है, गुरु कृपा है, सरलता है, वहीं साबर सिद्धि है।
साबर साधना कोई भी सम्पन्न कर सकता है, साधना के समय घी अथवा तेल के दीपक के अलावा अगरबत्ती तथा धूप अवश्य जलाना चाहिए, साबर साधना में कुछ विशेष कार्यों हेतु ही उपकरणों की आवश्यकता रहती है और ये सामग्रीयां शुद्ध तथा प्राण प्रतिष्ठयुक्त होनी चाहिए, किसी भी मुहूर्त में साधना की जा सकती है, इस हेतु रात्रि का समय विशेष प्रभावकारी माना जाता है। यों तो सैकड़ों हजारों साधनाएं हैं, और शायद विश्व में ऐसा कोई कार्य या सिद्धि नहीं है, जो साबर साधनाओं द्वारा सम्पन्न न होती हो। छोटे से छोटा कार्य और बड़े से बड़े कार्य के लिए भी साबर साधनाओं का सहारा लिया जा सकता है, फिर भी कुछ साबर साधनाओं का विवरण दिया जा रहा है, ये तो साबर साधनाएं है ही इसके अलावा भी सैकड़ों साधनाएं हैं, जिसके माध्यम से कार्य सिद्धि में सफलता पाई जा सकती है।
1- लक्ष्मी प्राप्ति का साबर मंत्र, 2- व्यापार लाभ साधना, 3- रोग नाशक साधना, 4- आत्मरक्षा साधना, 5- समस्त प्रकार की मनोकामनाओं को सिद्ध करने की साधना, 6- भूतों को वश में कर उससे मन चाहा कार्य कराने का प्रयोग, 7- जुए या घुड़ दौड़ में जीतने का प्रयोग, 8- चोर पकड़ने का प्रयोग, 9- भूत उतारने का प्रयोग, 10- फौजदारी, दीवानी मुकदमों में सफलता पाने का प्रयोग, 11- पति या पत्नि को पूरी तरह से वश में करने की साधना, 12- परीक्षा में पास होने का प्रयोग, 13- पुरूष या स्त्री, प्रेमी या प्रेमिका को वश में करने की साधना, 14- पूर्ण पौरुषता प्राप्त करने का प्रयोग, 15- मुराद पूरी होने का प्रयोग, 16- मनोवांछित पति प्राप्ति की साधना, 17- शीघ्र विवाह होने का प्रयोग, 18- मोहन और वशीकरण से संबधित प्रयोग, 19- बाल रोग निवारण की साधना, 20- अद्वितीय सुन्दरी बनने का प्रयोग, 21- सर्वकामना सिद्धि की साधना।
साबर मंत्रों के माध्यम से कुछ विशिष्ट सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।
1- भद्रकाली सिद्धि, 2- श्मशान काली सिद्धि, 3- कात्यायनी सिद्धि, 4- ज्येष्ठा लक्ष्मी सिद्धि, 5- कालरात्रि महासिद्धि, 6- अन्नपूर्णा सिद्धि, 7- इन्द्राक्षी सिद्धि, 8- स्वप्न वाराही सिद्धि, 9- कर्ण पिशाचिनी सिद्धि, 10- घण्टाकर्ण सिद्धि, 11- वटयक्षिणी साधना सिद्धि, 12- धनदा रति क्रिया साधना सिद्धि, 13- अष्ट अप्सरा देव कन्या साधना सिद्धि, 14- नृसिंह चेटक सिद्धि, 15- हाजरात सिद्धि। इसके अलावा भी साबर साधनाओं में गोरखनाथ ने कई सिद्धियों के बारे में अपने ग्रन्थ में विस्तार से लिखा है और उच्च कोटि के योगियों के लिए ये ग्रन्थ ‘पांचवां वेद’ है, इसके अनुसार साधना करने पर सिद्धि प्राप्त होती ही है।
साबर साधना में सर्वाधिक महत्व गुरु का होता है, अतः गुरु पूजा यंत्र और चित्र द्वारा सम्पन्न कर ही साधना सम्पन्न करनी चाहिए, जिससे साधना काल के दौरान भयंकर दृश्य अथवा बाधाएं विपरीत प्रभाव नहीं दे सकती हैं, साधना काल में एक समय ही भोजन करना उचित रहता है। साबर साधनाएं अत्यन्त सरल और सामान्य जन के लिए हैं, इस कारण इसमें किसी प्रकार की त्रुटि रह भी जाती है तो कोई हानि नहीं होती, ये साधनाएं अपने दैनिक क्रिया कलाप के साथ सम्पन्न की जा सकती हैं, पूर्ण श्रद्धा और विश्वास हो तभी ये साधनाएं करनी चाहिए।
जब भी कोई व्यक्ति किसी गन्दी विचारधारा से किसी प्रकार से मैली क्रिया करता है तो सफलता के स्थान पर हानि ही होती है और साबर साधनाओं मे तो यह बात विशेष रूप से लागू होती है, किसी गलत कार्य को करने हेतु अथवा गलत उद्देश्य से यह साधना नहीं करनी चाहिए, शत्रु का नाश होना चाहिए, यह सही बात है लेकिन आप जान बूझ कर अपने आनन्द के लिए किसी सही व्यक्ति पर तंत्रविद्या करते हैं तो यह गलत है।
1- साबर मंत्र का प्रयोग कभी भी, कहीं भी और किसी भी स्थिति में किया जा सकता है।
2- साबर मंत्र का प्रयोग कोई भी किसी भी धर्म या जाति का हो किसी भी उद्देश्य के लिए कर सकता है।
3- शास्त्रीय और वैदिक मंत्रों की अपेक्षा शीघ्र सिद्ध हो जाते हैं।
4- निश्चित फल प्रदान करते हैं।
5- साबर मंत्र अतिशीघ्र प्रभाव करते हैं।
साबर मंत्र का प्रभाव क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। मानव जगत की कोई समस्या कोई इच्छा अथवा कोई भी उद्देश्य हो, यदि इनका प्रयोग किया जाये, तो निश्चित लाभ प्राप्त होता ही है। साबर मंत्र अमोघ और सहज साध्य होने के कारण दुर्भाग्य, अभिशाप, दरिद्रता, अनिद्रा, भौतिक संकट निवारण, जीव-जन्तु त्रास, विष-प्रभाव, भ्रम, डर, श्वसन-दोष, मारण, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण, कीलन, स्तम्भन, विद्वेषण, रोगमुक्ति, शत्रुनाश, आपद् निवारण, सुरक्षा, समृद्धि, वैराग्य, भक्ति और ज्ञान ये सब कुछ प्रदान अथवा नष्ट कर देने में पूर्ण समर्थ होते हैं, इस प्रकार संसार की प्रत्येक समस्या के निवारण का सामर्थ्य साबर मंत्रों में निहित है। कार्य भेद के अनुसार ही मंत्रों के भी विभिन्न प्रकार होते हैं, इसलिए किसी कार्य विशेष के लिए निर्दिष्ट मंत्र विशिष्ट का ही जाप करना चाहिए। कभी-कभी ऐसा भी देखने में आता है कि एक ही समस्या के निवारण के लिए कई कई बार साबर मंत्रों की रचना हुई है। ऐसी दशा में योग्य गुरु से निर्देश प्राप्त कर साधक को अपने अनुकूल मंत्र का प्रयोग करना चाहिए।
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