





धनहीनता को जड़-मूल से समाप्त करने और लक्ष्मी प्राप्ति के कई उपाय मंत्रात्मक भी है और सामान्य पूजन भी किन्तु जब बात लक्ष्मी के पूर्ण स्वरूप को स्थायित्व रूप से धारण करने की होती है, तो कमला तंत्र की चर्चा करना आवश्यक हो जाता है। क्योंकि लक्ष्मी के सभी 108 स्वरूप भगवती कमला से ही उत्पन्न हुये हैं। जिन्हें श्री विद्या कहा जाता है। इसी श्री विद्या में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का रहस्य समाहित है। इनकी आराधना करने से साधक सभी क्षेत्रों में पूर्णता प्राप्त करता ही है।
जीवन के सभी कार्यों में कम समय में ही पूर्ण सफलता प्राप्त कर लेने के लिये क्रमबद्ध तरीका अपनाना पड़ता है। आध्यात्मिक क्षेत्र में साधनाओं को भक्ति से जोड़कर देखने के स्थान पर भावना से जोड़कर देखना चाहिये। भक्ति और भावना में सूक्ष्म भेद है। भक्ति स्वार्थ परक क्रिया है और भावना अपने इष्ट के प्रति सम्मान और प्रेम की स्थिति है। साधक को भावना प्रधान ही होना चाहिये।
जहां अर्थोपार्जन की बात आती है वहां यह आवश्यक हो जाता है कि व्यक्ति क्रम बद्ध उपाय कर अपने जीवन में स्थान दे, क्योंकि जितना अधिक प्रयास अर्थोपार्जन करने के लिये करना पड़ता है और जितना अधिक उपायों का प्रयोग व्यवहार में लाना पड़ता है, उतना अधिक सम्भवतः जीवन के किसी भी पक्ष में नहीं करना पड़ता। यदि व्यक्ति साधनात्मक रूप से किसी उपाय व मदद को प्राप्त नहीं करता अर्थात् साधनात्मक रूप से लक्ष्मी तंत्र का अवलम्बन नहीं लेता तब भी व्यवाहारिक रूप से तो उसे जोड़-तोड़ करनी ही पड़ती है। अर्थात् साधनात्मक नहीं तो ‘व्यवाहारिक तंत्र’ का प्रयोग करना पड़ता है। साधनात्मक रूप से तंत्र का प्रयोग करना तो फिर भी सहज है जबकि इस व्यवहारिक तंत्र में तो न जाने कैसे-कैसे प्रयास करने पड़ते हैं। वैध-अवैध रूप से धन प्राप्त करने के प्रयास किये जाते हैं और निरन्तर इधर से उधर दौड़ते रहने में मानसिक रूप से उलझे रहने में वह आनन्द तो समाप्त ही हो जाता है, जिसके लिये इतना परिश्रम करके धन एकत्रित करने का प्रयास किया जाता है।
और फिर वह धन एकत्रित करना भी व्यर्थ हो जाता है, जिसका हम उपयोग ही ना कर पाये, साथ ही जीवन अनेक व्याधियों, रोगों, कष्टों, संकटों में उलझ जाता है। क्योंकि शास्त्रोक्त दृष्टि से लक्ष्मी के साथ ही साथ अनेक कर्म दोष भी हमारे जीवन में आते हैं। जब ये कर्म दोष इकठ्ठे हो जाते हैं, तो जीवन में एक विस्फोटक क्रिया होती है और सब कुछ तहस-नहस हो जाता है। आपने अपने आस-पास देखा होगा कि कोई व्यक्ति सभी तरह के सुख-सौभाग्य, धन, वाहन, भवन से पूर्ण है और अचानक ऐसी घटनायें उसके सामने घटित होने लगती हैं कि उसके जीवन का दृश्य ही पूरा परिवर्तित हो जाता है। कल धनवान कहा जाने वाला व्यक्ति एक-दो साल में ही निर्धन हो जाता है। जिसे हम तंत्र बाधा कहते हैं, वास्तव में तंत्र बाधा कई प्रकार के होते हैं, जिसमें धन आगमन के साथ कर्म दोष भी एक है। आज का व्यक्ति इस कर्म दोष से अधिक पीडि़त है, इसलिये यह आवश्यक है कि आर्थिक सुदृढ़ता तो हो पर वैध रूप से अर्थात् धन के साथ हम दोष ना अर्जित करें। ऐसे में आवश्यक है कि हम ऐसा उपाय करें, जिससे जीवन में श्रेष्ठ धन अर्जित करने की निरन्तरता तो बनी रहे पर साथ ही कर्म दोष का प्रभाव हमारे जीवन में ना पड़े और हम आर्थिक रूप से सुदृढ़ हों।
जीवन में धन के लिये हाय-तौबा न हो, कमला तंत्र इसी का उपाय है। कमला तंत्र लक्ष्मी साधनाओं का पूर्ण संग्रह है। जो मूलरूप से आद्या शक्ति का विशिष्ट रूप है। आद्या शक्ति का मूल स्वरूप शक्ति प्रधान है और शक्ति ही सभी क्रियाओं का मूल तत्व है।
कमला तंत्र की सबसे अधिक विशेषता यह है कि यह जीवन में दरिद्रता का विनाश जड़मूल से करती है। दरिद्रता का अभिशाप व्यक्ति का सारा व्यक्तित्व इस प्रकार से ग्रसित कर लेता है कि वह असमय ही जीवित रहते हुये मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। दरिद्रता के द्वारा व्यक्ति का जीवन तो अभावग्रस्त होता ही है उसका चिन्तन, आध्यात्मिकता कुठिंत और धुंआ देती हुई हो जाती है। यदि ऐसी स्थिति पर समय रहते नियंत्रण न प्राप्त किया जाय तो व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यक्तित्व, जीवन व साथ ही उसका परिवार भी असमय समाप्त हो जाने की स्थिति में आकर खड़ा हो जाता है। धन के अभाव में होने वाली नित्य गृह कलह से ग्रसित व्यक्ति जीवन से भी निराश रहता है।
प्रायः दुर्भाग्यवश, पूर्व जन्म कृत दोषों के कारण, व्यापार में अचानक घाटा आ जाने पर या व्यापार में ही किसी खरीद पर गलत निर्णय ले लेना, पार्टनर द्वारा धोखा दे दिये जाने पर, नौकरी छूट जाने पर, ऋण में डूब जाने पर या बेरोजगारी के कारण व्यक्ति के जीवन में ऐसी स्थितियां आ जाती है कि उसे कोई भी मार्ग नहीं सूझता और ऐसी स्थिति में प्रारम्भिक आवश्यकता होती है कि उसका अभाव और दरिद्रता समाप्त हो। जो अशुभ उसके ऊपर मंडरा रहा है, जो दैन्य और कष्ट उसके पूरे परिवार को त्रस्त कर रहा है, वह समाप्त हो और तब निश्चित रूप से कमला तंत्र ही उसके जीवन में परिवर्तन ला सकता है।
जीवन में ऐश्वर्यवान बनना, सम्पन्न बनना, भौतिक पक्षों से सुखी व सन्तुष्ट होना अति आवश्यक है। किन्तु जीवन में गतिशीलता प्रदान करने व जीविका पार्जन के साथ ही साथ अतुल्य धन प्राप्ति के लिये आवश्यक है कि कमला तंत्र जीवन में धारण किया जाये और विशेष रूप से वहां जहां पर जीवन में उपरोक्त दशायें आकर जीवन को पीडि़त कर गयी हों, कहा जाता है कि जिसकी दिशा ठीक नहीं होती उसके जीवन की दशा भी विषम बन जाती है। जब तक विपरीत परिस्थितियों का विनाश नहीं होगा, तब तक प्राथमिक आवश्यकताओं को पूर्ण करना भी दूभर हो जायेगा। चेतनावान साधक स्थिति का अनुमान लगाकर पूर्व में ही निश्चित धारणा बना लेते हैं। जो जीवन को पूर्ण लक्ष्मीमय बनाने में समर्थ है।
इस वर्ष दीपावली पर्व पर इन्हीं भाव चिंतन को साकार रूप देने के लिये सर्व मांगल्य कमला महाविद्या दीपावली महोत्सव की साधनात्मक क्रिया परम पूज्य सद्गुरुदेव व वन्दनीय माता जी के सानिध्य में चेतनावान शिष्यों को सम्पन्न करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। पूज्य सद्गुरुदेव स्वयं ही रजिस्टर्ड साधको को श्री विद्या का दुर्लभ संस्कार सिंह लग्न और वृषभ लग्न में पारद श्री यंत्र पर सम्पन्न करायेंगे। साथ ही राज-राजेश्वरी श्री सूक्त लॉकेट, सर्व मांगल्य कमला महाविद्या दीक्षा और कमला तंत्र साधना पैकेट प्रदान किया जायेगा। जिसकी चेतना क्रियात्मक रूप से आत्मसात कर साधक पूर्ण लक्ष्मीमय होकर जीवन के सभी सुख भोग सकेंगे साथ ही जीवन में धन की आवक निरंतर बनी रहेगी और श्री विद्या, श्री सूक्तम् की चेतना से आपूरित पारद श्री यंत्र को अपने भवन में स्थापित कर आप दीर्घायु, धन लक्ष्मी, कर्म लक्ष्मी, आरोग्य लक्ष्मी, भू-भुवः लक्ष्मी, वास्तु लक्ष्मी, ऋण मोचन लक्ष्मी, सिद्ध लक्ष्मी युक्त सभी सुलक्ष्मियां चिर स्थायित्व रूप से आपके जीवन में स्थापित होगी।
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