





अर्जुन पेड़ का अर्जुन ‘नामकरण केवल इसके स्वच्छ सफेद रंग के आधार पर किया गया है। अर्जुन शब्द का संस्कृत में यौगिक अर्थ सफेद, स्वच्छ होता है। पांडवकुमार अर्जुन से इस पेड़ का कोई खास सम्बन्ध नजर नहीं आता। इस पेड़ के संस्कृत नामों में पार्थ, धनंजय आदि जो पर्यायवाची नाम दिए गए हैं, वे केवल वैद्यक काव्य अर्जुन शब्दार्थ बोधक शब्द की योजना करने के लिए ही दिए गए हैं और उनका कोई खास तात्पर्य नहीं मालुम होता है।
अर्जुन प्रकृति से शीतल, हृदय के लिए हितकारी, कसैला; छोटे-मोटे कटने-छिलने पर, विष, रक्त संबंधी रोग, मेद या मोटापा, प्रमेह या डायबिटीज, व्रण या अल्सर, कफ तथा पित्त कम होता है। अर्जुन से हृदय की मांसपेशियों को बल मिलता है, हृदय की पोषण-क्रिया अच्छी होती है। मांसपेशियों को बल मिलने से हृदय की धड़कन ठीक और सबल होती है। सूक्ष्म रक्तवाहिनियों (artery½) का संकोच होता है, इस प्रकार इससे हृदय सशक्त और उत्तेजित होता है। इससे रक्त वाहिनियों के द्वारा होने वाले रक्त का स्राव भी कम होता है, जिससे सूजन कम होती है।
आयुर्वेद में अर्जुन के पेड़ का प्रयोग औषधी के रूप में फल और छाल के रूप में होता है। अर्जुन की छाल के फायदे में सबसे ज्यादा उपकारी टैनिन होता है, इसके साथ पोटाशियम, मैग्निशियम और कैल्शियम भी होता है। आपको विस्तार से अर्जुन की छाल के फायदे बताएंगे ताकि आप इसकी उपयोगिता को आसानी से समझ सकें।
अर्जुन का उपयोग डायबिटीज के मरीजों के लिये उपयोगी साबित हो सकता है। अर्जुन छाल से जुड़े एक शोध से इस बात की पुष्टि होती है। शोध में पाया गया कि अर्जुन छाल में हेक्सोकिनेस, एल्डोलेस, फॉस्फोग्लुकोसोमेरेस और ग्लूकोनियोजेनिक जैसे कई एंजाइम्स पाए जाते हैं। इनकी मौजूदगी के कारण अर्जुन की छाल में एंटीडायबिटिक गुण मौजूद होता है। अर्जुन छाल का यह गुण किडनी और लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाकर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस आधार पर डायबिटीज नियंत्रण के मामले में अर्जुन की छाल को सहायक माना जा सकता है।
हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी अर्जुन की छाल लाभकारी साबित हो सकती है। अर्जुन की छाल में ट्राइटरपेनॉइड (Triterpenoids½) नाम का एक खास रसायन पाया जाता है। इस खास रसायन की उपस्थिति के कारण ही अर्जुन छाल हृदय जोखिमों को दूर रखने में कारगर साबित हो सकती है। वहीं, शोध में स्पष्ट तौर पर यह भी जिक्र मिलता है कि यह हाई बीपी और कोलेस्ट्रोल के साथ ही हृदय रोग के कारण होने वाले सीने के दर्द में भी राहत दिलाने का काम कर सकती है।
अर्जुन की छाल में मौजूद ट्राइटरपेनॉइड नाम का खास रसायन हृदय स्वास्थ्य के लिये उपयोगी है। वहीं, शोध में यह भी माना गया है कि इसमें एंटीहाइपरटेंसिव (बीपी कम करने वाला) गुण मौजूद होता है। बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिये भी अर्जुन की छाल काफी मददगार साबित हो सकती है।
सर्दी-खांसी की समस्या में राहत पाने के लिए भी अर्जुन की छाल को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। दो अलग-अलग शोधों में इस बात का जिक्र मिलता है। एक शोध में माना गया है कि अर्जुन की छाल श्वसन संबंधी विकार को दूर करने में मदद कर सकती है। वहीं, अन्य शोध में पाया गया कि अर्जुन की छाल में एंटीट्यूसिव (कफ कम करने का प्रभाव) पाया जाता है, जो खांसी में राहत दिला सकता है।
अर्जुन का वृक्ष एक चमत्कारिक औषधि है। जिसका इस्तेमाल टूटी हड्डियों को जोड़ने के लिए भी किया जाता है। अर्जुन के फल में हड्डियों को मजबूत करने वाले तत्व प्रचूर मात्रा में पाये जाते हैं। साथ ही यह हड्डियों का दर्द दूर करने में कारगर है। इसकी छाल के पाउडर को दूध के साथ सेवन कर सकते हैं।
अर्जुन की छाल का प्रयोग पेट संबंधित कई परेशानियों को दूर करने में लाभकारी है। अर्जुन की छाल का पानी पीने से पाचन तंत्र को लाभ होता है। यह हल्के कब्ज से राहत दिलाने में फायदेमंद है। साथ ही यह गैस्ट्रिक, अल्सर और एसिडिटी के लक्षणों को कम करने में भी मदद करता है।
अर्जुन छाल के एक चम्मच चूर्ण को जल या दूध के साथ सेवन करने से एवं इसकी छाल को जल में घिसकर त्वचा पर लेप करने से कुष्ठ में तथा व्रण में लाभ होता है। अर्जुन छाल का काढ़ा बनाकर पीने से भी कुष्ठ में लाभ होता है।
अगर रक्तपित्त की समस्या से ग्रस्त हैं तो अर्जुन का सेवन करने से जल्दी आराम मिलेगा। 2 चम्मच अर्जुन छाल को रात भर जल में भिगोकर रखें, सबेरे उसको मसल-छानकर या उसको उबालकर काढ़ा बनाकर या अर्जुन की छाल की चाय की तरह से पीने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
क्षय रोग या तपेदिक के लक्षणों से आराम दिलाने में अर्जुन का औषधीय गुण काम करता है। अर्जुन की त्वचा, नागबला तथा केवाँच बीज चूर्ण (2-4 ग्राम) में मधु, घी तथा मिश्री मिलाकर दूध के साथ पीने से क्षय, खांसी रोगों से जल्दी राहत मिलती है।
त्वचा के लिए भी अर्जुन की छाल काफी उपयोगी साबित हो सकती है। अर्जुन की छाल से जुड़े एक शोध में इस बात को सीधे तौर पर स्वीकार किया गया है। शोध में माना गया है कि खुजली, चुभन और चकत्तों के साथ ही एक्जिमा और सोरायसिस जैसी त्वचा से संबंधित समस्याओं में अर्जुन की छाल सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकती है।
जानलेवा बीमारियां जैसे हृदय सम्बन्धी रोग, क्षय रोग आदि के उपचार व बचाव के लिये अर्जुन की छाल एक रामबाण औषधि है। इसके साथ-साथ यह सामान्य बीमारियों जैसे बुखार, कान दर्द, किसी शारीरिक अंग में सूजन आदि से भी राहत देने में सहायक होता है। इसमें मौजूद तत्त्व शरीर में उच्च ऊर्जा का संचार करते हैं और थकान को कम करते हैं।
इसमें मौजूद ट्राईहाइड्रोक्सी ट्राईटरपीन, इलेजिक एसिड, मोनो कार्बोक्सिलिक एसिड व बीटा-सिटोस्टिरोल जैसे कई प्रकार के पोषक तत्त्व प्रचूर मात्रा में होते हैं जो कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों की रोकथाम हेतु महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अर्जुन की छाल का नियमित सेवन हमारे शरीर को मजबूती देता है और मांसपेशियों को बल प्राप्त होता है। साथ ही इसका सही मात्रा में सेवन हमारे हृदय को पर्याप्त पोषण भी प्रदान करता है।
दिल की बीमारियों की रामबाण औषधि अर्जुन की छाल के अनेक स्वास्थ्य फायदे हैं। हजारों सालों से आयुर्वेद के साथ-साथ मॉर्डन चिकित्सा विज्ञान में भी इसके प्रयोग से कई बिमारियों का उपचार किया जाता है। लेकिन इसके सेवन से पहले कुछ बाते अवश्य ध्यान रखनी चाहिए कि अधिक मात्रा में इसका सेवन न करें। ज्यादा मात्रा में इसे लेने से नुकसान भी हो सकता है। जिन व्यक्तियों की किसी लम्बी बीमारी की वजह से दवाइयाँ चल रही हैं वे इसको अपने आहार में शामिल करने से पहले चिकित्सक की राय जरूर ले लें।
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