भूत-प्रेत बाधा एवं तंत्र बाधा निवारण तेजस्विता पराक्रम की प्राप्ति हेतु चैत्रीय पूर्णिमा के सुअवसर पर दीक्षा आत्मसात् करें
प्रातः स्मरामि हनुमन्त मनन्तवीर्यं, श्रीरामचन्द्र
चरणाम्बुज चंचरीकं। लंकापुरी दहननन्दित देव
वृन्दं, सर्वार्थसिद्ध सदनं प्रथित प्रभावम्।।
अर्थात् ‘मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के चरणाविन्दों के प्रति भ्रमर के समान मुग्ध प्रेमी, जिन्होंने रावण की नगरी लंका को जलाकर दुःखी देवगणों को आनन्दित किया, जिनकी सिद्धि व बल-वीर्य से समस्त विश्व परिचित है, ऐसे भक्तवत्सल श्री हनुमान को मैं प्रातः बेला में अनन्य भक्ति भाव से नमन करता हूँ, जिससे वे कृपा कर अपने समान हमें भी पराक्रमी बनने का वरदान दें।’
हनुमान वीरता और बल के प्रतीक है, इसलिये इनका एक नाम ‘संकटमोचन’ भी है अर्थात् ये संकटों को हरने वाले, रोग-शोक, व्याधि, पीड़ा, संताप का प्रशमन एवं शत्रुओं को दमन करने वाले एकमात्र देव है, जो संसार की सर्वश्रेष्ठ सिद्धियों में से एक माने जाते हैं। शास्त्रवचनानुसार इन्हें ‘पवनपुत्र’ ओर अंजनी पुत्र’ के नाम से सम्बोधित किया जाता है।
मंत्र
ऊँ हुं हुं ह्सौः हनुमते हुं
साधक 11 माला मंत्र जप करे और प्रतिदिन हनुमान आरती व गुरू आरती सम्पन्न करें तो निश्चय ही सिद्धि प्रदायक महावीर हनुमान के साक्षात जाज्वल्यमान दर्शन प्राप्त होंगे।
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