





जहां जीवन में गृहस्थ है तो उसके साथ बाधाएं तो आएंगी ही लेकिन शिव गौरी की साधना कर जीवन को रस से युक्त बनाया जा सकता है। जीवन में नित्य प्रति आनन्द रस की वर्षा होती रहे ऐसा अनुभव हो कि हर सुबह एक नई çप्रसन्नता लेकर जीवन में आयी है, तो वह जीवन अनूठा ही जीवन होता है, उसमें प्रसन्नता का रस ही रस भरा रहता है।
श्रावण मास तो शिव साधना सम्पन्न करने का सर्वश्रेष्ठ मास है, उसके पश्चात यह शिव-गौरी साधना किसी भी सोमवार को सम्पन्न किया जा सकता है।
साधना विधान
साधना साम्रगी- गौरी शंकर रूद्राक्ष, नीली हकीक माला।
और जल, पंच पात्र, चन्दन, कुंकुम, पुष्प, अक्षत, अगरबती, दीपक, भोग, फल आदि।
इस साधना को प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में आरम्भ करना चाहिये, इस दिन स्नान करके पीले वस्त्र धारण कर, पूजा कक्ष में पीले आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जायें। अपने सामने लकड़ी के बाजोट पर पीला वस्त्र बिछा कर उसके ऊपर गुरू चित्र और गणपति के चित्र या मूर्ति को स्थापित करें और निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुये पीले चावल 108 बार चढ़ायें-
‘‘ऊँ गणेशाय नमः’’
अब दोनों हाथ जोड़ कर प्रार्थना करें- हे! भगवान गणपति मुझे जीवन में रस, ओज, आनन्द युक्त गृहस्थ सुख के लिये मुझ पर कृपा करें। इसके बाद गुरू चित्र का भी पंचोपचार पूजन करके ताम्र या स्टील प्लेट पर कुकुंम से या केशर से स्वास्तिक चिन्ह बनाकर पुष्प की पंखुड़े बिछायें और उसके ऊपर ‘‘गौरी शंकर रूद्राक्ष’’ स्थापित करें। इसके बाद ‘‘नीली हकीक माला’’ को गोल करके उसे गौरी-शंकर को पहना दें। अगरबती जलायें, घी का दीपक प्रज्वलित करके थाली के सामने रखें।
पवित्री करण करें –
बायें हाथ में जल लेकर निम्न मंत्र का पाठ करते हुये दायें हाथ से पूरे शरीर में छिड़कें।
ऊँ पवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाहृाभ्यन्तरः शुचिः।।
आसन पूजन –
अक्षत और पुष्प आसन के नीचे रखें।
ऊँ पृथ्वि! त्वया धृता लोका देवि! त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारस्य मां देवि! पवित्रं कुरू चासनम्।।
संकल्प –
दायें हाथ में जल लेकर संकल्प करें-
ऊँ विष्णु र्विष्णु र्विष्णुः भारतवर्षे (अपने गांव, जिला का नाम उच्चारण करें) संवत् 2082 श्रावण मासि समये कृष्ण पक्षे एकादशी तिथौ (तिथी का उच्चारण करें) सोम बासरे (वार का उच्चारण करें), निखिल गोत्रोत्पन्न, अमुकदेव शर्मा (अपना नाम उच्चारण करें) अहम, मम सपरिवारस्य तंत्रबाधादि सर्वबाधा निवारणार्थं, धर्म अर्थ काम मोक्ष चतुर्बिध पुरूषार्थ सिध्यर्थं, सर्वारिष्ट सर्वपापक्षयार्थ दीर्घायुरारोग्य धनधान्य पुत्रपौत्रादि समस्तसम्पत्प्रवृद्धयर्थ, शृति-स्मृति पुराणोक्त फल प्राप्त्यर्थं, अभीष्ट सिध्यर्थं, श्री गुरू कुलदेवता इष्टदेवता प्रीत्यर्थं, गृहस्थ सुख प्राप्ति शिव गौरी श्रावण साधना कर्माहम करिष्ये। (जल भूमि पर छोड़ दें)
ध्यान –
हाथ में पुष्प लेकर निम्न मंत्र उच्चारण कर यंत्र पर अर्पित कर जगदम्बा का ध्यान करें-
ध्यानेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचन्द्रावतंसं, रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं पर शुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
स्तुतिममर गणैर्व्याघ्रकृतिं वासनं, विश्वाघं विश्ववन्घं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्राम्।।
‘‘गौरी शंकर रूद्राक्ष’’ के ऊपर चन्दन, पुष्प, अक्षत अर्पित करें। प्रसाद अर्पित करें फल चढायें 2 आचमन जल अर्पित करें। ‘‘नीली हकीक माला’’ को हाथ में लेकर माला के सुमेरू में कुंकुम, पुष्प और 1 आचमन जल अर्पित करें। अब उसी माला से निम्न मंत्र की 11 दिनों तक 5 माला जप करें।
मंत्र
।। ऊँ भवानी गौर्यें पति सुख सौभाग्यं देहि देहि शिव शक्तयै नमः।।
जप के उपरांत माला को पूर्ववत यंत्र के ऊपर रख दें और हाथ जोड़कर निम्न जप समर्पण का पाठ करें-
ऊँ गुह्याति गुह्य गोप्त्र त्वं गृहाण् अस्मत् कृतं जपम्।
सिद्धिर्भवतू मे देवी! त्वत प्रसादान् महेश्वरी।।
इसके बाद शिव आरती व गुरू आरती सम्पन्न करें।
यह 11 दिन की साधना है, उसके बाद भी तब तक कार्य सिद्धि न हो तब तक विधिवत पूजन के साथ उसी माला से 1 माला मंत्र जप करते रहें। इस साधना में शुद्धता तथा आचार-विचार, खान-पान का अवश्य ध्यान रखें। शुद्ध शाकाहारी भोजन लेना चाहिये तथा स्वस्थ चिन्तन करना चाहिये।
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