





आयुर्वेदिक ग्रंथों में रागी को लेकर कई फायदेमंद बातें बताई गई हैं। मंडुआ के सेवन से अत्यधिक प्यास लगने की समस्या खत्म होती है, शारीरिक कमजोरी दूर हो सकती है और कफ दोष को ठीक किया जा सकता है। आप मंडुआ का प्रयोग मूत्र रोग को ठीक करने, शरीर की गंदगी साफ करने के लिये भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं शरीर की जलन, त्वचा विकार, किडनी या पथरी की समस्या में भी रागी का प्रयोग किया जाता है।
रागी क्या है?
अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में रागी के बारे में जानकारी मिलती है। मंडुआ या रागी का पौधा लगभग 1 मीटर तक ऊँचा होता है। मंडुआ का बीज गोलाकार, गहरे-भूरे रंग के, चिकने होते हैं। इसकी बीज (ragi seeds) झुर्रीदार और एक ओर से चपटे होते हैं। इन्हें ही मड़वा या मंडुआ कहा जाता है। इससे बने आहार मोटापे तथा डायबिटीज से ग्रस्त रोगियों के लिये विशेष रूप से फायदेमंद होते है।
रागी के फायदे और उपयोग
मंडुआ के औषधीय प्रयोग, प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-
सांसों की बीमारी में फायदेमंद
अनेक लोगों को सांसों की बीमारी हो जाती है। आप मंडुआ का विधिपूर्वक इस्तेमाल करेंगे तो सांसों के रोग में फायदा मिलता है। मंडुआ आदि द्रव्यों से विधिपूर्वक बनाये गये शृङ्गयादि घृत (मधूलिकायुक्त) का मात्रापूर्वक प्रयोग करें। इससे सांसों की बीमारी में लाभ होता है।
ऑस्टियोपोरोसिस में रागी के फायदे
रागी में मौजूद पोषक तत्व हड्डियों को कमजोर होने से रोकते हैं और उन्हें स्वस्थ एवं मजबूत बनाये रखते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रागी के सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना कम होती है। यदि आप ऑस्टियोपोरोसिस के मरीज हैं तो अपनी डाइट में रागी का सेवन बढ़ा दें।
कब्ज में फायदेमंद
बहुत लोगों को कब्ज की समस्या रहती है। दरअसल कब्ज एक ऐसी बीमारी है जो कई रोगों का कारण बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार रागी का नियमित सेवन लीवर को स्वस्थ बनाये रखने में मदद करता है। जिससे गैस, एसिडिटी और कब्ज आदि समस्याओं में भी आराम मिलता है। अगर आप पेट की कब्ज या गैस से परेशान रहते हैं तो रागी का सेवन करें।
कुष्ठ रोग में रागी का प्रयोग
मंडुआ को सफेद चित्रक के साथ मिलाकर सेवन करने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
महुआ, हाऊबेर, नीलकमल तथा मधूलिका के चूर्ण को घी तथा शहद के साथ सेवन करें। इससे उल्टी, कुष्ठ रोग, हिचकी और सांसों की बीमारी में लाभ मिलता है।
मोटापा घटाने में सहायक है रागी
आज के समय में अनियमित जीवनशैली और अधिक मात्रा में फास्ट फूड खाने के कारण मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप अपनी डाइट में हेल्दी चीजों को शामिल करें तो मोटापे पर नियंत्रण पाया जा सकता है। एक शोध के अनुसार रागी में ऐसे औषधीय गुण हैं जो फैट को कम करने में मदद करते हैं।
एनीमिया में मददगार
रागी आयरन का भी एक समृद्ध स्रोत है। 100 ग्राम रागी में 3.2 मिलीग्राम आयरन होता है। क्योंकि शरीर में आयरन की कमी से एनीमिया होता है, अपने आहार में रागी खाद्य पदार्थों को शामिल करने से एनीमिया के इलाज में मदद मिलेगी।
उच्च कोलेस्ट्राल में राहत
रागी में बीटा-ग्लूकेन, अरेबिनोक्सिलेन्स और सेल्युलोज जैसे पॉलीसेकेराइड भी होते हैं। वे आंत में तत्वों की चिपचिपाहट बढ़ाते हैं और कोलेस्ट्रॉल अवशोषण की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।
डायबीटीज में फायदेमंद
रागी में पॉलिफिनॉल्स और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी दूसरे अनाज से कम होता है। इसलिये रागी खाने से ब्लड शुगर लेवल कम होता है। नाश्ते में रागी चीला या रोटी जरूर खायें।
बच्चों के लिये रागी
बच्चों की उचित वृद्धि और विकास के लिये कैल्शियम एक आवश्यक खनिज है। चूंकि रागी कैल्शियम का एक समृद्ध स्रोत है, यह शिशुओं के लिये फायदेमंद है क्योंकि यह उनकी वृद्धि और विकास को बढ़ावा देता है और उनकी हड्डियों को मजबूत बनाता है। रागी प्रोटीन का भी एक अच्छा स्रोत है जो बच्चों में कुपोषण को रोकने में मदद करता है।
सर्दी-जुकाम में मंडुआ का प्रयोग लाभदायक
सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी में भी मंडुआ का उपयोग बहुत अधिक लाभ पहुँचाता है। इसके लिये आपको गुग्गुलु, राल, पतंग, प्रियंगु, मधु, शर्करा, मुनक्का, मधूलिका तथा मुलेठी लेना है। इनका काढ़ा बनाकर गरारा करना है। इससे रक्तज तथा पित्तज सर्दी-जुकाम की समस्या में लाभ होता है।
नीद और डिप्रेशन भगाए
रागी में ऐसे एंटीऑक्सिडेंट्स पाये जाते हैं जो तनाव को कम करते हैं। इसे खाने से एंग्जाइटी, डिप्रेशन और नींद न आने की समस्या दूर हो जाती है। रोजाना रागी खाने से मेंटल हेल्थ अच्छी रहती है।
हीमोग्लोबिन बढ़ाने में फायदेमंद
रागी, आयरन का अच्छा सोर्स है। इसलिये, हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाने के लिये, इसे डाइट में जरूर शामिल करना चाहिये। जिन लोगों के शरीर में खून की कमी है या जिन्हें अक्सर थकान और कमजोरी रहती है, वे इसे जरूर खाएं।
त्वचा को स्वस्थ रखने में फायदेमंद
रागी के सेवन से स्किन को भी फायदे मिलते हैं। रागी में पाये जाने वाले अमीनो एसिड्स स्किन के कोलाजन को बढ़ाने का काम करते हैं। इससे झुर्रियों की दिक्कत भी दूर रहती है। इसमें पाये जाने वाला विटामिन ई भी स्किन की सेहत को अच्छी रखता है।
रागी के नुकसान
वैसे तो रागी सेहत के लिये बहुत अच्छी है। लेकिन, कुछ लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिये। अगर आपको किडनी में पथरी है या किडनी से जुड़ी कोई दूसरी समस्या है, तो आपको रागी नहीं खानी चाहिए क्योंकि इसमें प्रोटीन और कैल्शियम बहुत अधिक होता है। थायराइड में भी रागी न खाने की सलाह दी जाती है। रागी की तासीर गर्म होती है, ऐसे में गर्मियों में इसे अधिक नहीं खाना चाहिये। जिन लोगों का पाचन कमजोर है, उन्हें भी इसे पचाने में मुश्किल हो सकती है।
आयुर्वेद में सही खान-पान को सेहतमंद रहने की कुंजी बताया गया है। सही खान-पान का मतलब है कि आप न्यूट्रिशन्स से भरपूर चीजों को सही समय पर, सही मात्रा में डाइट में शामिल करें। साथ ही, शरीर की प्रकृति और मौसम के हिसाब से डाइट में जरूर बदलाव करें। सेहतमंद रहने में मिलेट्स काफी हद तक मदद कर सकते हैं। आज के समय में एक बार फिर से लोग मिलेट्स को डाइट में शामिल करने लगे हैं। रागी एक हेल्दी मिलेट है। यह न्यूट्रिशन्स से भरपूर है। इसीलिये रागी को आप अपनी डाइट में शामिल कर अपना स्वास्थ्य श्रेष्ठ बना सकते हैं।
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