





काल अपने आपमें एक साधारण शब्द नहीं है, यह तो अपने भीतर एक पूरा संसार समाये हुए है, काल एक गतिमान तत्व है, और काल गति का, जीवन का अन्त भी है। यह विरोधाभास अद्भुत है, जो इस काल की गति को नहीं पहिचान सकता और इसको अपने अनुकूल नहीं कर पाता, वह काल के अधीन हो कर मृत्यु को प्राप्त होता है।
उज्जैन में स्थित महाकाल शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगो में दिव्यतम है, जिसके दर्शन करना ही अपने-आप में परम सौभाग्य की बात है और जैसे विशेष क्षणों में इस शिवलिंग का पूजन, आराधना की जाए तो व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि शिव ही एकमात्र ऐसे देव हैं, जो काल को भी पीछे धकेल सकते हैं, जिन्होंने यम का पाश काट नचिकेता को भी अपनी बांहों में ले लिया था। ऐसे ही शिव की नगरी उज्जैन, जिसका कण-कण ज्योति और चेतना से आपूरित है साथ ही महामृत्युंजय के तेज से दिव्यतम है। एक बार पुनः महाकालेश्वर की नगरी में गुंजायमान होगा वह दिव्य नाद, जो पूज्यपाद गुरुदेव के श्री मुख से मुखरित हो उन समस्त साधकों व शिष्यों के हृदय को झंकृत करता हुआ, उन्हें दिव्यता व चैतन्यता से आपूरित कर देगा। उज्जैन की उसी पुण्य सलिला पवित्र भूमि पर मृत्युजंय शक्ति दिवस पर 19, 20, 21 सितम्बर को त्री-दिवसीय महाकाल भैरव महामृत्युजंय साधना शिविर सम्पन्न होगा।
शिव के अंश स्वरूप, शक्ति सम्पन्न, शक्ति स्वरूप महाकाल के सेवक के रूप में भैरव की मान्यता विख्यात है। भैरव जन-जन के देव हैं, जो साधक मंत्रों को नहीं जानता, पूजा का विशेष विधान नहीं जानता, वह भी भैरव पूजा कर उन्हें पूर्णरूपेण प्रसन्न कर सकता है।
भैरव की मान्यता मूल रूप से रक्षाकारक देव के रूप में ही है। बड़े से बडे़ यज्ञ में पहले भैरव स्थापना की जाती है, जिससे कि भैरव अपने शक्ति से दसों दिशाओं को आबद्ध कर देते हैं। फिर शुभ-मंगल कार्य में कोई विघ्न उपस्थित नहीं हो सकता है, भूत, पिशाच, प्रेत, तांत्रिक प्रयोग कैसा भी प्रबल प्रहार किया जाये तो जहां भैरव की उपस्थिति है, वहां से यह प्रहार उलटे लौट आते हैं और इस प्रकार से गलत तांत्रिक प्रयोग को करने वालों का ही नाश कर देते हैं।
प्राचीन कालभैरव मंदिर प्रांगण में भैरव शक्ति पूजन, हवन, महामाल्य पितृ श्राद्ध के दिवसों पर पितृ पक्ष में अपने सभी संताप, दोष, रोग-कष्ट की समाप्ति हेतु साधनात्मक क्रियायें व महामृत्युंजय रूद्राभिषेक महाकाल मंदिर प्रांगण में सम्पन्न होगी। उज्जैन में सद्गुरुदेव के सानिध्य में तीन दिवसीय साधना शिविर में साधक के, परिवार सहित सभी सदस्य को अवश्य ही भाग लेना चाहिए जिससे उसके जीवन की दुर्भिक्षता, न्यूनता, गरीबी, रोग-शोक से युक्त जीवन के दोष, पाप, कष्ट, पीड़ा निवारण पूर्णरूपेण हो सके। इस हेतु आध्यात्मिक साधनात्मक वातावरण में दिव्य पवित्र तपोभूमि पर साधना, आराधना, पूजा-अर्चना, स्तुति, वन्दना, आदि कर सकेगें।
जिनके जीवन के पुण्य उदय होते हैं या जो व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है वही ज्योतिर्लिंग के दर्शन अपने गुरु के सानिध्य में कर पाता है। ऐसा ही दिव्य अवसर हमें प्राप्त होने जा रहा है और वह भी पूज्य गुरुदेव के साहचर्य में इससे बड़ा सौभाग्य और हो भी क्या सकता है। इससे बड़ा जीवन का पुण्य और क्या हो सकता है, जब पूज्य गुरुदेव साथ हों और वह भी उस दिव्य स्थल पर, जहां कृष्ण ने भी सांदीपन आश्रम में रह कर शिव साधना की थी, उस पुण्यस्थली पर गुरुदेव द्वारा दी गई चैतन्यता, ऊर्जा-शक्ति और आशीर्वाद से ही उस साक्षात् शिव-गौरी का पूजन सम्पन्न हो रहा हो, तो यह अपने-आप में सौभाग्य है।
उस तीर्थ-स्थली पर पूज्य गुरुदेव के निर्देशन में इस शिविर का आयोजन एक महत्वपूर्ण बात है, जिसका ज्ञान हर किसी को नहीं है और कोई अभागा ही होगा, जो इन आनन्ददायक क्षणों को गंवा कर अपने घर में बैठा रह जायेगा, हतभागा ही ऐसे दिव्य अवसर से चूक सकता है। इस उज्जयिनी नगरी में प्राचीन कालभैरव मंदिर प्रागंण में भैरव शक्ति साधना पूजन हवन सम्पन्न होगा। क्षिप्रा नदी में स्नान, सर्व पितृ दोष निवारण हेतु गुरुदेव द्वारा तर्पण व साधको के पूर्वजों की पूर्ण मुक्ति हेतु श्राद्ध कर्म की क्रिया होगी। कालसर्प दोष मुक्ति साधना कर अपने जीवन को दीर्घायु, आरोग्य युक्त, धन वैभव, यश-लक्ष्मी की आपूरति हेतु प्रत्येक साधक द्वारा रूद्राष्टाध्यायी नवग्रह और शिव-शक्ति महामृत्युजंय मंत्रों से आपूरित महाकालेश्वर स्व रूद्राभिषेक सम्पन्न होगा। नित्य प्रतिदिन योग, प्राणायाम, मंत्र-जप, साधना पूजा, प्रवचन, भजन आरती सम्पन्न होगी। साथ ही दोनों समय सात्विक प्रसाद और भोजन की व्यवस्था गुरुदेव द्वारा प्रदान की जायेगी।
स्व रूद्राभिषेक और वेदमंत्रों का घोष, प्रातःकालीन सांयकालीन आरती एवं भस्म आरती आदि के साथ गुरुदेव के प्रवचन होंगे। ऐसा साधनात्मक वातावरण उपस्थित होगा जिससे अपने-आप को अद्भुत और चिरआनन्द की प्राप्ति से साधक आपूरित कर सकेगे। इन साधनात्मक क्रियाओं को सम्पन्न कराने के पीछे अर्थ यह है, कि उस पावन-स्थल पर इन साधनाओं को शीघ्रता से सम्पन्न किया जा सकता है और यदि गुरुदेव का आशीर्वाद भी साथ हो तो शीघ्र ही उनमें सिद्धि भी प्राप्त हो जाती है।
सृष्टि में अठारह ऋषियों के नाम प्रमुख रूप से आए हैं और उनमें भी सप्त ऋषियों को विशेष मान्यता दी गई है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति उन्हीं ऋषियों की संतान है और उस ऋषि के नाम पर ही गोत्र कहा जाता है। पितृ पक्ष चैतन्य पक्ष है, जिस समय ब्रह्माण्ड में आकाश गंगा का निर्माण होता है, उस समय हमारे पूर्वज हमारे द्वारा अर्पण की हुई श्रद्धा का भाव ग्रहण करते हैं। उस समय अर्पण और तर्पण अपने पूर्वजों के लिये आवश्यक है।
हमारे मृत आत्मीय, मृत्यु के उपरान्त भटकें नहीं, उनको कोई निकृष्ट योनि न मिलें, इसके लिए कुछ विधान शास्त्रों में बताये गये हैं। एक बात जो मृत्यु के उपरान्त अलग-अलग धर्मों में सामान्य रूप से मिलती है, वह यह कि मृत्यु के उपरान्त कुछ दिन निर्धारित किये गये, जिनमें शोक मानने जाने की प्रथा रखी गयी। इसके पीछे मूल भावना यही है कि इन दिनों में दिवंगत आत्मा सर्वाधिक सक्रिय रहती है, एवं अपने परिवार के सदस्यों से सम्पर्क साधने की इच्छुक रहती है। ऐसी दशा में जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु, किसी दुर्घटना में हुई हो एवं मृत व्यक्ति प्रेत-योनि अथवा ऐसी ही कोई विकृत योनि में भटक रहा हो, तब ‘पितरेश्वर उपाय’ अवश्य करना चाहिये।
हमारे शास्त्रों में पितृ वर्ग को सम्मान देने के लिए तथा केवल उनसे ही सम्बन्धित पूजन उपासना करने के लिए पूरे वर्ष में जिस पक्ष विशेष को निर्धारित किया गया है, वह पितृपक्ष कहलाता है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक का सारा काल पितृ पक्ष कहलाता है। इन दिनों में अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा पूर्वक जो शास्त्रोक्त विधान सम्पन्न किया जाता है उसे ‘महालय श्राद्ध’ की संज्ञा दी गई है।
इस हेतु पूज्य गुरुदेव ने अपने समस्त शिष्यों और साधकों के लिए उज्जैन में पितृ पक्ष में कालभैरव महामृत्युजंय साधना शिविर का आयोजन करने कर निर्णय किया है जिससे सभी शिष्यों-साधकों के पितरों को मुक्ति प्रदान करने की प्रक्रिया, तर्पण, श्राद्ध कर्म क्षिप्रा नदी में सम्पन्न कराया जायेगा। आप सभी को इस शिविर में आना ही है और अपने सद्गुरु के सानिध्य में अपने लिए मंत्र जाप, साधना, दीक्षा प्राप्त कर अपने आने वाले भविष्य को शिवस्वरूप गौरीमय, उज्ज्वल और आनन्दायक बना सकें।
महाकाल की पावन भूमि व सदाशिव महादेव के ज्योर्तिलिंग व नर्मदा तथा क्षिप्रा नदी भक्तों को चेतना शक्ति से आपूरित करती है। ऐसी दिव्य मनोरथ पूर्ति उज्जैन की भूमि पर स्वामी सच्चिदानन्द जी महाराज के दिव्य आशीर्वाद और सद्गुरुदेव के सानिध्य में पितृ मुक्ति श्राद्ध कर्म प्रक्रिया सम्पन्न होगी। आत्म शुद्धि, देह विकार दोष निवारण हेतु काल भैरव मंदिर प्रागंण में हवन पूजन, पूर्व जन्मकृत दोष व सर्व पितृ दोष निवारण तर्पण तथा पूर्वजों के पिण्ड दान व श्राद्ध की प्रक्रिया क्षिप्रा नदी तट पर सम्पन्न होगी। महाकाल मंदिर प्रांगण में गुरुदेव के सानिध्य में स्व रूद्राभिषेक किया जायेगा जिससे कि प्रत्येक साधक मृत्युजंय शक्ति से शिव-गौरी युक्त बन सके। वे ही पंजीकरण करवायें जो भगवान महादेव की अमृतरूपी चेतना और गौरी स्वरूपा लक्ष्मी शक्ति से अपने आप को आपूरित करना चाहते हैं, जो अपनी स्वयं की बुद्धि-ज्ञान और विवेक से जीवन में कर्मशील रहते हैं, अपने स्वयं के निर्णय से ही जीवन में क्रियाशील हैं।
सौभाग्य होगा उनका जो इस आयोजन में भाग लेने के लिए उज्जैन में उपस्थित होंगे क्योंकि इस बार कुछ ऐसा घटित होने जा रहा है और पूज्य गुरूदेव की इच्छा भी है कि-थोड़े समय में ही मैं सम्पूर्ण ज्ञान, चिन्तन इन शिष्यों में लुटा दूं और इसी प्रयास में वे हर क्षण कार्यरत हैं और उन विशेष क्षणों की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब वे इस प्रकार के कार्यों को पूर्णता दे सकें।
19 सितम्बर 2014 शुक्रवार को मध्यान्त काल तक उज्जैन पहुँचना अनिवार्य है।
19 सितम्बर को सांध्य बेला में प्राचीन कालभैरव मंदिर प्रागंण में भैरव शक्ति साधना पूजन हवन सम्पन्न होगा।
20 सितम्बर क्षिप्रा नदी में स्नान, सर्व पितृ दोष निवारण हेतु गुरुदेव द्वारा तर्पण व साधकों के पूर्वजों की पूर्ण मुक्ति हेतु श्राद्ध कर्म की क्रिया होगी।
21 सितम्बर कालसर्प दोष मुक्ति साधना कर अपने जीवन को दीर्घायु, आरोग्य युक्त, धन-वैभव, यश-लक्ष्मी से आपूरित करने हेतु प्रत्येक साधक द्वारा रूद्राष्टाध्यायी नवग्रह और शिव शक्ति महामृत्युजंय मंत्रों से आपूरित महाकालेश्वर स्व रूद्राभिषेक सम्पन्न होगा।
नित्य प्रतिदिन योग, प्राणायाम, मंत्र-जप, साधना पूजा, प्रवचन, भजन आरती सम्पन्न होगी। साथ ही दोनों समय सात्विक प्रसाद और भोजन की व्यवस्था गुरुदेव द्वारा प्रदान की जायेगी।
महाकाल मंदिर प्रांगण उज्जैन में ही DORMITORY अर्थात् हॉल में सामूहिक रूप से ठहरने और विश्राम की व्यवस्था की है जिससे पारिवारिक और आत्मिक वातावरण बन सकें।
पूर्व में ही ऐसी व्यवस्था कर के आयें कि 21 सितम्बर को सांध्य आरती के बाद सीधे घर को प्रस्थान कर सकें जिससे कि गुरुदेव के सानिध्य में पवित्र दिव्य अलौकिक पूर्ण चैतन्य स्थानों पर जो उक्त क्रियायें सम्पन्न की है उसका पूरा लाभ आप को जीवन भर अक्षुण्ण बना रहे। पंजीकरण अनिवार्य हैं।
पंजीकरण शुल्क: 5100/- (Rs. Five Thousand One Hundred Only) जिससे कि आप ही से सम्बन्धित साधना सामग्री मंत्र सिद्ध चैतन्य की जा सकें।
प्रत्येक प्रक्रिया में दीक्षा न्यौछावर सम्मिलित नहीं है।
सम्पर्कः- जोधपुर कार्यालय- 0291-2517025, 0291-2517028, 07568939648, 08769442398
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,