





मानव जीवन 84 लाख योनियों में जन्म लेने के बाद मिलता है ईश्वर द्वारा दिये गये इस अनमोल वरदान को प्राप्त कर हम मानव जीवन में प्रवेश लेते हैं। जिसे हम जन्म दिवस, जन्मदिन, बर्थडे के रूप में बडे ही उत्साह के रूप में मनाते है। हर वर्ष स्वयं को या हमारे बच्चों के जन्म दिवस पर विभिन्न तरह के प्रलोभन द्वारा हम अपने आप को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते है। परन्तु उस मन का जो हमारे चित में है, उस आत्मा का, उस ईश्वर का जो हम में बसा है वह करोड़ों साल विभिन्न योनियों के बाद मनुष्य जीवन व एक शुद्ध आत्मा का स्वरूप प्राप्त किया है। ईश्वर द्वारा दिये गये इस अनमोल जीवन को निरर्थक के कार्यों में लगा कर अपनी आत्मीय शक्ति से मनुष्य जीवन के चेतना से और ईश्वर के वरदान स्वरूप मिली देह से दूर हो जाते है अपने हेतु, उद्देश्य, मर्म, चिंतन, श्रेष्ठता प्राप्ति की क्रियाओं से भटक जाते है, इससे जीवन अन्धकार व निराशा कि ओर बढ़ने लगता है व स्वयं को दुखों से, कष्टों से घिरा पाते है और ऐसी अनेक-अनेक समस्यायें भी हमारे द्वारा ही उत्पन्न होती रहती है। क्योंकि हम अपना जीवन भेड़-बकरीयों की तरह निर्मित कर लेते है। परिवार समाज जिस तरफ हाँकता है उस अधोगति की ओर चलते रहते है। इससे जीवन निराशा और अवसाद, रोग पीड़ा से युक्त हो जाता है। हममें ही मनुष्य जीवन पाकर हमारे स्वयं के पास अपने कार्यों को बनाने और बिगाड़ने की शक्ति है।
हम कर्मशील मनुष्य है जो स्वयं का उद्धार कर सकते हैं। परन्तु हमने हमारे मन की, अपनी आत्मा की, अपने अन्दर बसे ईश्वर की, अपने गुरु की बाते सुनना बन्द कर दिया है- हमने आत्म चिंतन करना बन्द कर दिया है। हमने वेदों पुराणों, उपनिषदो, धार्मिक ग्रंथों, श्रेष्ठ महापुरूषों के वचनों को सुनना बंद कर दिया और इसके विपरित हम व्यर्थ व निरर्थक बातों के बारे में सोचने लगे है। हमने अपने से ज्यादा दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते है, मेरे बारे में ऐसा क्यों सोचते है, दूसरों को मेरे प्रति क्या नजरीया है? – परन्तु हम स्वयं को जानने का समय ही नहीं देते है। हम दूसरों की सोच से प्रभावित हो कर निराश हो जाते हैं। हम आत्म चिंतन करते ही नहीं, दूसरों की सोच को सत्य मान लेते है।
और यह आत्म चिंतन होगा भी कैसे क्योंकि हमारे मन में तो निरर्थकता पूर्ण बाते समाई हुई है। इस गन्दगी से भरे हुए होने से हमें हमारे मन की बात सुनाई नहीं देती। इन सभी समस्याओं को समाधान भी हमारे भावों, विचारों, क्रियाओं और ज्ञानी महापुरूषों का अनुसरण कर ही प्राप्त कर सकते है। हमें बस आवश्यकता है तो बस इसे सुनने की, इसे समझने की अपने अन्दर बसी आत्मिक शक्ति को जगाने की, अपने अन्दर बसे अवगुणों को निकालने की और यह सब सम्भव है अपने अन्दर बसे नीलकंठ हारी शिव ने विष का गरल कर सांसारिक मनुष्य को पूर्ण आनन्द, अमृत और रस का भाव प्रदान करते है वैसी ही क्रिया सम्पन्न करने से सड़े-गले जीवन से पूर्ण निवृत्ति प्राप्त की जा सकती है।
भगवान शिव एक ऐसी शक्ति है जो हमारी बुराई, न्यूनता का समूल नाश कर सकते है, हमारे पापों व कुकर्मों के फल स्वरूप जीवन की नारकीय स्थितियों का शमन कर सकते है। सृष्टि के निर्माता भी शिव, सृष्टि के सर्जन कर्ता भी शिव, देवों के देव भी भगवान शिव ही है। शिवशक्ति से ही सभी पापों विकारों का निश्चित रूप से शमन संभव है। हर वर्ष हम अपने व अपने परिजनों पुत्र, पुत्रियों का जन्म दिवस और वैवाहिक दिवस मनाते है- इसके पीछे चिंतन भाव यही रहता है कि हम और हमारे परिवार के सदस्य दीर्घायु, सुखमय, आरोग्यमय, भौतिक सुखों से युक्त हो सके और यह दिवस हमारे जीवन में चिर स्थायी बन सके परन्तु यह सब क्रिया करने के बाद भी जीवन की स्थितियों में मामूली सा भी परिर्वतन नहीं आ पाता है। इसके पीछे मूल कारण जो जीवन में न्यूनता या कमियाँ है उसके मूल जड़ की ओर नहीं जाते और जीवन दुःखों, कष्टों, बाधाओं से चलता ही रहता है।
इन सब कुस्थितियों में निश्चित रूप से पूर्ण परिर्वतन किया जा सकता है जब आप अपने परिवार सहित सद्गुरु के निर्देशन में जन्मदिवस अथवा वैवाहिक मास में गुरुधाम कैलाश सिद्धाश्रम जोधपुर अथवा दिल्ली में आकर शिव परिवारमय स्थितियों के निर्माण हेतु महामृत्युजंय रूद्राभिषेक पति-पत्नी और बच्चों के साथ प्रकाण्ड पंडितों के सानिध्य में पूर्ण विधि-विधान से सम्पन्न करेंगे तो इसके फलस्वरूप जन्मोत्सव अथवा वैवाहिक दिवस(शादी की वर्ष गाठँ) हर दृष्टि से पूर्ण मंगलमय और आनन्दयुक्त हो सकेगा। इस रूद्राभिषेक के फलस्वरूप निश्चित रूप से जीवन में सुस्थितियां निर्मित हो सकेगी क्योंकि आप भगवान सदाशिव महादेव का महामृत्युजंय रूद्राभिषेक पूर्ण प्रभावशाली चैतन्य ज्योर्तिलिंग शिवलिंग पर साथ ही श्रेष्ठतम दिव्य शक्ति स्थल पर परिवार सहित सम्पन्न कर रहे है और वह शक्ति पीठ जहां सैंकड़ों -सैंकड़ों साधनायें सम्पन्न हो चुकी है और निरन्तर वेद मंत्रों का गुंजरण नियमित रूप से होता है ऐसा स्थान दिव्य ज्योर्तिलिंग से भी अधिक श्रेष्ठतम हो जाता है।
जब भी आपका मानस चिंतन हो और जीवन में अपने पापों का नाश करने के लिए अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए, अपने बच्चों की आयु वृद्धि, जीवन में निरन्तर सफलता प्राप्ति और सभी भौतिक सुखों से युक्त होने के लिए ऐसी क्रिया निश्चित रूप से करनी ही चाहिए। अपने आप को अपनी शक्ति का आभासा कराने के लिए गुरु आशीर्वाद तले स्वयं उपस्थिति होकर अपने स्वयं के कैलाश सिद्धाश्रम में सम्पूर्ण विधि-विधान से रूद्राभिषेक सम्पन्न कराये। जिससे अपने जीवन के हर तरह के अन्धकार और न्यूनताओं को दूर कर अपने विकारों को समाप्त कर सके।
इस एक दिवसीय रूद्राभिषेक में केवल पति-पत्नी और अपने स्वयं के बच्चे ही भाग ले सकेंगे। जिससे की उस महामृत्युजंय रूद्राभिषेक का पूर्ण फलप्रद लाभ केवल और केवल आपके ही परिवार को अक्षुण्ण रूप से प्राप्त हो सके।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,