





गुरू के आशीर्वाद तले वह स्थान है जहां आपको शरण मिलेगी आपके जीवन की अज्ञानता से, यह तो वह सिद्ध कर्म का फल है जो आपको जन्मों-जन्मों तक भी भटक कर प्राप्त नहीं हो सकता यह तो केवल कुछ सौभाग्यशालियों को प्राप्त होता है, जिनके भाग्योदय हो गया है, उनके जन्म जन्मान्त के पापो का क्षय होना प्रारम्भ हो गया है।
जब आपके स्वयं के नियंत्रण में यह नहीं है कि आप किस कुल, धर्म, क्षेत्र में जन्म लेंगे, किन पूर्वजों के पुत्रों के पाप व कर्म का बोझ अपने ऊपर ढोओगे। तो आप किस प्रकार स्वयं का उद्धार करोगे।
हमें अपने पितरों के प्रति कृतज्ञ तो होना ही चाहिये साथ ही उनका पूर्ण रूप से आदर व अपनत्व का भाव रखना ही चाहिये परन्तु पीढ़ी दर पीढ़ी उस पितृ दोष को क्यो भोगे!
जब यह सतत सत्य है कि आप अपने जीवन के दोष व पाप निवृति कर सकते हो, तभी जीवन पूर्ण रूपेण संस्कार युक्त होगा, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आपको सद्गुरूदेव व कैलाश सिद्धाश्रम द्वारा विधि-वत श्राद्ध कर्म करने की विधा बतलायी जाती है। वर्ष के ये पन्द्रह दिन में किये जाने वाले कर्मो से आप जन्म जन्मान्तर के पाप दोषों से मुक्त हो सकते है। गुरू आपके जीवन में भटकाव की स्थितिया नहीं चाहते वे तो आपके कष्टों के हरण का मार्ग बतलाते है वे नहीं चाहते कि आप लुन्ज पुन्ज सा दरिद्रता पूर्ण जीवन व्यतीत करे वे तो आपको धन-वैभव व दिव्य चेतना से परिपूर्ण करना चाहते है। गुरू तो आपको शुद्ध-पवित्र अपने प्राणों से जोड़ने की क्रिया करते है, आपको गुरू की चेतना को, गुरू की सुगन्ध को अपने अन्दर समाहित करना है, जीवन को घसीटने की क्रिया वहीं नहीं अपितु पूर्णता की क्रिया को करना है। अपने जीवन के दुर्भाग्य को मिटा सौभाग्य पूर्ण होना है।
इस 21-22 सितम्बर को सर्वपितृ निवृति महाकाल गौरी लक्ष्मी साधना महोत्सव में उज्जैन म.प्र में भाग लेकर अपने जीवन को पाप मुक्त व गुरूमय होने की क्रिया को प्रारम्भ करें।
आपका अपना
विनीत श्रीमाली
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