





पूर्ण पुरूषत्व का तात्पर्य है- पौरूष सम्बन्धी किसी अक्षमता से पीड़ित न हो, पूर्ण सुख का अनुभव कर पाता हो अथवा अद्वितीय पराक्रम एवं प्रखरता इस कला से पूर्ण व्यक्तित्व कहीं भी, किसी भी क्षेत्र में अपने प्रतिद्वन्द्वियों से भयभीत नहीं होता, वह सदैव निडर एवं बलशाली बना रहता है। जितने भी संसार में उदात्त गुण होते है, सभी कुछ उस व्यक्ति में समाहित होते हैं, जैसे-दया, दृढ़ता, प्रगाढ़ता, ओज, बल, तेजस्विता इत्यादि। इन्हीं गुणों के कारण वह सारे समाज में श्रेष्ठतम व अद्वितीय माना जाता है। जीवन के सभी आयामों को स्पर्श कर उसे पूर्ण पौरूष बना देती है। वह जो चाहे, जब चाहे, जहां चाहे अपने मनोनुकूल कार्य कर सकता है या करवा सकता है, फिर वह असम्भव कार्यों को करने में भी सक्षम एवं सामर्थ्यवान हो जाता है।
सूर्य असीम शक्ति और सामर्थ्य से युक्त ग्रह है। आध्यात्मिक दृष्टि में सूर्य को प्राण ऊर्जा का महत् स्त्रोत कहा गया है। ऋग्वेद में सूर्य को जगत की आत्मा बताया गया है। इसका तात्पर्य है, कि पृथ्वी पर जो चेतना एवं हलचल है, उसका उद्गम स्त्रोत सूर्य ही है। सूर्य उपासना के माध्यम से शरीर की अलौकिक शक्तियों को सुप्त अवस्था से निकालकर जाग्रतमय चेतना की ओर क्रियाशील किया जा सकता है।
अतः अपने जीवन को सूर्य तेजस्वितामय पौरूषता से युक्त करने हेतु सूर्यग्रहण पर्व के विशेष मुहूर्त में सद्गुरूदेव जी वैदिक मंत्रों से पूजा-साधना युक्त हवन सम्पन्न कर सूर्य तेजस्वितामय प्रबल पौरूष प्राप्ति दीक्षा प्रदान करेंगे। जिससे सूर्य शक्ति युक्त परिपूर्ण प्रबल पौरूषता से अखण्ड सौभाग्य, सुख-समृद्धि, शतायु जीवन, कार्य-व्यापार-रोजगार वृद्धि, सहस्त्र लक्ष्मीमय सुस्थितियों का विस्तार हो सकेगा।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,