





भगवान विष्णु के अवतार महायोगीश्वर परमब्रह्ममूर्ति सद्गुरू दत्तात्रेय ने यज्ञ व कर्म अनुष्ठान की विधि सहित समस्त वेदों का पुनर्रूद्धार किया। भगवान दत्तात्रेय शीघ्र प्रसन्न होकर साधकों की मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। इनके चरण पादुकाओं की पूजा का विशेष महत्त्व है क्योंकि वे श्रेष्ठ फलप्रदायक हैं।
यदि साधक भगवान दत्तात्रेय को प्रसन्न कर कृपा प्राप्त कर लेते हैं तो उनकी बुद्धि, ज्ञान, चेतना, बल, ऐश्वर्य में निरन्तर व दिनों दिन उन्नति होती रहती है।
भगवान दत्तात्रेय की पूर्ण विधि-विधान पूर्वक साधना सम्पन्न करने से साधक की निर्णायक क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, वह उचित समय पर उचित कदम उठा सकता है, जीवन में असमंजस की स्थिति पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है, जिससे चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, सरकारी नौकरी हो या व्यवसाय, उसे सफलता प्राप्त होती है, मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्री दत्तात्रेय सर्व कार्य सफल दीक्षा प्राप्त करने पर साधक के सभी रूके हुये, अटके हुये कार्य पूर्ण हो जाते हैं। सभी मनोकामनाओं की पूर्ति भी होती है। और जब साधक की मानसिक स्थिति सबल एवं शांतिपूर्वक होती है तो वह गृहस्थ जीवन की सभी जिम्मेदारियों का सफलता पूर्वक निर्वहन कर पाता है। जिससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि का विस्तार होता है। गृहस्थ जीवन सफल बनता है।
श्री दत्तात्रेय सर्व कार्य सफलता गृहस्थ सुख प्राप्ति साधना
साधना सामग्री- चरण पादुका, रूद्राक्ष माला।
इस प्रयोग को साधक दत्तात्रेय जयन्ती अथवा किसी भी गुरुवार को या किसी भी शुभ तिथि की रात्रि में सम्पन्न कर सकता है। साधक स्नान आदि से निवृत्त हो कर, लाल वस्त्र धारण कर तथा लाल आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठ जायें।
सर्वप्रथम साधक को सामान्य गुरु पूजन करना चाहिये तथा गुरु मंत्र की चार माला जाप अवश्य करना चाहिए। फिर सद्गुरुदेव जी से श्री दत्तात्रेय साधना सम्पन्न करने की अनुमति लेकर उनसे साधना की निर्बाध पूर्णता और सफलता के लिये प्रार्थना करें।
इसके बाद साधक भगवान गणपति का स्मरण करके एक माला गणपति मंत्र का जप करें। फिर गणपति जी से साधना की निर्विघ्न पूर्णता और सफलता के लिये प्रार्थना करें।
इसके बाद साधक को चाहिये कि वह साधना के पहले दिन संकल्प अवश्य करें।
साधक को अपने सामने एक बाजोट पर प्राण प्रतिष्ठित तथा चैतन्य चरण पादुका को स्थापित करना चाहिये। चरण पादुका के पास ही भगवान दत्तात्रेय का चित्र रखें। अब चरण पादुका व चित्र का पूजन करें। पूजन में गुग्गल का धूप प्रज्ज्वलित करना चाहिये। दीपक तेल का हो। साधक भोग के लिये किसी भी वस्तु का प्रयोग कर सकता है।
चरण पादुका का पूजन करने के बाद साधक रुद्राक्ष माला से निम्न मन्त्र की 11 माला मंत्र का जप करें
मंत्र
।। ऊँ द्रां दत्तात्रेयाय नमः ।।
मंत्र जप पूर्ण होने पर साधक समस्त जप भगवान दत्तात्रेय को एक आचमनी जल छोड़कर समर्पित कर दें। फिर भगवान श्री दत्तात्रेय जी का वन्दन करे तथा सर्व कार्य सफलता व गृहस्थ सुख वृद्धि हेतु प्रार्थना करे।
यह साधना एक दिवसीय ही है, आप चाहे तो इसे ग्यारह दिनों तक भी सम्पन्न कर सकते हैं।
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