





सेंधा नमक के अन्य नाम-मिनरल हैलाइट, पिंक हिमालयन नमक, लाहौरी नमक, सिंधव नमक, गुलाबी नमक, हिमालयन सेंधा नमक आदि।
पश्चिम के देशों में लगभग आधे वयस्कों को उच्च रक्तचाप है। हम अपने भोजन में अक्सर समुद्री नमक का ही ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जो कि हमारी सेहत के लिहाज से काफी नुकसानदेह साबित होता है। सेंधा नमक, जिसे गुलाबी नमक भी कहा जाता है, आयुर्वेद में इसे सर्वोच्च नमक माना जाता है। इसमें मौजूद लौह और अन्य खनिजों की उच्च मात्रा के कारण इसका रंग सफेद से गुलाबी अथवा गहरा लाल होता है।
इसमें कैल्शियम, क्लोराइड, सोडियम और जिंक सहित 84 खनिज पाये जाते हैं। जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाये रखते हैं, मांसपेशियों की ऐंठन से राहत देते है और शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करते हैं।
कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा के कारण हिमालयन नमक हड्डियों के निर्माण और मजबूती के लिए लाभकारी है।
चेहरे पर सेंधा नमक की मालिश करने से मृत त्वचा हट जाती है और त्वचा साफ हो जाती है। जोड़ों की अकड़न को कम करने के लिये इसे किसी वाहक तेल के साथ मिलाकर मालिश के लिये भी इस्तेमाल किया जा सकता है। पैरों को सेंधा नमक मिले गर्म पानी में भिगोने से इसके इलेक्ट्रोलाइट संतुलन गुण के कारण सूजन से राहत मिलती है।
अपने दैनिक जीवनचर्या में सेंधा नमक का सेवन करने से लाभ:
सेंधा नमक का उपयोग करते समय बरती जाने वाली सावधानियां
– यदि आपके शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन है तो लंबे समय तक सेंधा नमक का सेवन न करें।
– यदि आपको गुलाबी नमक या इसके घटकों से एलर्जी है तो डॉक्टर की देखरेख में ही इसका उपयोग करें।
– उच्च रक्तचाप होने पर हिमालयन नमक का सेवन कम मात्रा में करना चाहिये।
-यदि आप लंबे समय तक दवा ले रहे हैं, तो दवाइयों और नमक के सेवन के बीच अंतराल रखें।
सेंधा अथवा गुलाबी नमक का उपयोग कैसे करें:
2.खाना पकाने में: इसे रोजमर्रा की जिंदगी में खाना पकाने के लिए सामान्य नमक की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
क. भोजन से पहले दिन में दो बार सूखे अदरक के टुकड़े सेंधा नमक (गुलाबी नमक) के साथ लें।
ख. इसका उपयोग उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिये भी किया जा सकता है।
इसके लिये-
चेहरे को सादे पानी से धोएं और सुखाएं नहीं।
हथेली में थोड़ा सा गुलाबी नमक लें और चेहरे पर हल्के हाथों से मालिश करें।
फिर चेहरे को सादे पानी से धोकर, थपथपाकर सुखा लें।
अस्थमा और सांस लेने में तकलीफ होने पर, रात को सोने से पहले सरसों के तेल में गुलाबी नमक मिलाकर पीठ और छाती की मालिश करें।
गले के संक्रमण और सर्दी-जुकाम से राहत पाने के लिये सेंधा नमक का इस्तेमाल दिन में दो बार गरारे करने के लिए भी किया जा सकता है।
7.जोड़ों की अकड़न: सेंधा नमक का इस्तेमाल आयुर्वेदिक तेल बनाने में भी व्यापक रूप से किया जाता है क्योंकि यह वात दोष को संतुलित करने में मदद करता है और जोड़ों के दर्द और अकड़न से राहत देता है।
कुछ अन्य स्थानों में सेंधा नमक के उपयोग:
एक बाल्टी पानी में आधा-एक चम्मच हिमालयन नमक मिलाएं।
त्वचा की सूजन और एलर्जी के लक्षणों से राहत पाने के लिए इस पानी से स्नान करें।
गर्म पानी में आधा-एक चम्मच नमक मिलाएं।
प्रभावित जगह पर सूजन और दर्द कम करने के लिए इस पानी से गर्म सिकाई करें।
बेहतर परिणाम के लिये इस उपाय को दिन में दो बार आजमाएं।
आधा-एक चम्मच सेंधा नमक लें।
इसमें एक चम्मच त्रिफला पाउडर मिलाएं।
साथ में आधा चम्मच सरसों का तेल भी मिलाएं और सभी सामग्री को अच्छी तरह से मिक्स करें।
एक बार में मिश्रण की एक-दो चुटकी लें और दांतों और मसूड़ों पर मालिश करें तथा पानी से कुल्ला करें।
यह उपाय सूजे हुए और दर्द प्रदान करने वाले मसूड़ों को आराम देने में उपयोगी है।
केवल सेंधा नमक खाने से खतरा: आयोडीन थायरॉयड कार्यों और कोशिकीय चयापचय के लिए महत्वपूर्ण है। गुलाबी हिमालयन नमक में आयोडीन युक्त नमक की तुलना में कम आयोडीन होता है। यही वजह है कि आयोडीन की कमी वाले लोगों को गुलाबी नमक के साथ आयोडीन युक्त नमक का भी सेवन करना चाहिये।
सेंधा नमक का अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे उच्च रक्तचाप और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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