





कहते हैं कि श्री कृष्ण के भक्त कभी दुःखी नहीं रहते, सदा अपनी मस्ती में मगन रहते हैं और इसी तरह से जीवन की बाधाओं से पार भी हो जाते है। श्री कृष्ण के जीवन का प्रत्येक क्षण उत्सव समान उल्लासपूर्ण है। ठीक उसी भांति श्रावण मास में श्री कृष्ण की साधना संपन्न कर श्री माधव सर्व बाधा हरण दीक्षा प्राप्त करने से साधक संताप, उदासीनता, अवसाद, निराशा युक्त जीवन से मुक्त हो नई उमंग से युक्त बन जाता है। उसे प्रत्येक दिन त्यौहार समान प्रतीत होने लगता है, निराशा उसे छू भी नहीं पाती और साधक श्री कृष्ण की ही भांति उत्साह युक्त हो जीवन पथ की प्रत्येक बाधा से एक-एक कर मुक्ति प्राप्त कर लेता है।
श्रीकृष्णमय जीवन प्रेम उमंग प्राप्ति साधना
साधना सामग्री – कृष्ण चैतन्य यंत्र, कृष्णत्व गुटिका व योगेश्वर माला।
भाद्रपद मास की कृष्ण अष्टमी को या किसी भी अष्टमी की रात्रि 10:00 बजे पश्चात् स्नानादि से निवृत्त होकर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, उत्तर दिशा की ओर मुंह कर अपने पूजा स्थान में बैठ जायें, सर्वप्रथम संक्षिप्त गणेश/गुरू पूजन सम्पन्न कर गुरू मंत्र की चार माला जाप करें।
इसके पश्चात् ‘कृष्ण चैतन्य यंत्र’ व ‘कृष्णत्व गुटिका’ को स्नान करा कर शुद्ध वस्त्र से पोछकर अपने सामने लकड़ी के बाजोट पर किसी पात्र में पुष्प बिछाकर स्थापित करें। यंत्र व गुटिका का पूजन कुंकुम, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप व नैवेद्य आदि से करें। इसके पश्चात् निम्न मंत्र की ‘योगेश्वर माला’ से 11 माला मंत्र जप नित्य 11 दिनों तक सम्पन्न करें।
मंत्रः
।। ऊँ श्रीं क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय ह्रीं ऊँ स्वाहा ।।
|| Om Shreem Kleem Krishnaayei Govindaayei Hreem Om Swaaha ||
साधना समाप्ति पश्चात् गुटिका को पीले धागे में पिरो कर गले में धारण कर लें और यंत्र व माला को किसी नदी या पवित्र जलाशय में विसर्जित कर दें। साधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें, शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करें व भूमि शयन करें।
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