





सद्गुरूदेव के वचनानुसार सिद्धाश्रम दिवस जैसे अतुलनीय अवसर पर शिविर हेतु ऐसे स्थान का चयन किया है जो कि शिव-स्वरूप में उगना महादेव और गौरी शक्ति स्वरूपा छिन्नमस्ता चैतन्य रूप में विराजमान है। मिथिलांचल प्राचीन काल से ही संस्कृति एवं आध्यात्म और ज्ञान का केन्द्र रहा है।
इसी के फलस्वरूप इन्हीं पौराणिक महत्वों के साथ दिव्य तेजमय देव तत्वमय भगवती छिन्नमस्ता का जागृत स्थान हैं। माता जगदम्बा सीता की जन्मस्थली एवं विष्णुरूपाय नारायण भगवान श्रीराम-जानकी की परिणय स्थली है। मान्यता है कि भगवान सदाशिव पृथ्वी लोक में प्रवास काल में मैथिल कोकिल कवि विद्यापति के भावों से भावविभोर हो कर महादेव ने उगना रूप में चाकर बन कर अपना स्वरूप दिखाया इसी नाम से प्रसिद्ध उगना महादेव स्थान दक्षिण में अवस्थित है। शिवरात्रि और वैशाख शुक्लपक्ष के प्रदोष पर्व पर लाखों भक्त आकर उगना महादेव की पूजा अर्चना कर अपने जीवन को शिवगौरी मय बनाने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। दिव्य उगना मंदिर के उत्तर में समरमाथा पर्वत श्रृँखलाएं साधक संन्यासी और पर्यटकों को अपनी ओर सम्मोहित करती है।
पूर्ण रूपेण दत्तचित्त होकर संयम शील भाव से इस दिव्यतम स्थान पर साधना करने से निश्चिंत रूप से भगवती छिन्नमस्ता साधक को सिद्धि प्रदान करती है। उचैठ लौकहा मधुबनी स्थान में विराजित भगवती छिन्नमस्ता ने साक्षात प्रकट हो कर कालीदास जैसे मूढ़ व्यक्ति को शक्ति स्वरूप में सभी विद्याएँ प्रदान कर ज्ञान और चेतना से श्रेष्ठ काव्यमय पौरूषता प्रदान कर काव्यमय युग पुरूष बना दिया। जहाँ शिव और शक्ति साथ-साथ रहती है उस स्थान पर साधना पूजा करने से मनुष्य पुरूषोतम मय बनने की ओर अग्रसर होता है जिससे जीवन की मलिनता जीर्ण-शीर्ण स्थितियां, दरिद्रता को पूर्ण रूपेण समाप्त कर साक्षीभूत शिव-शक्ति रूप में सिद्धाश्रम के दर्शन कर अपने जीवन को भौतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से परिपूर्ण बना सकता है।
छिन्नमस्ता नारायण सिद्धाश्रम शक्ति साधना शिविर का आयोजन – 21, 22 मई 2013 को उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रांगण लौकहा, जिला- मधुबनी, बिहार में सम्पन्न होगा। प्रत्येक सद्गुरु दीक्षार्थी को छिन्नमस्ता मुद्रिका तथा शक्तिपात दीक्षार्थी को सद्गुरुदेव के आर्शीवाद और सिद्धाश्रम सम्पुटित सिद्धाश्रम चैतन्य माला उपहार स्वरूप प्रदान की जाएगी।
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