





मानसिक तनावः नजर की सभी गड़बडि़यों का मुख्य कारण मानसिक तनाव होता है। मानसिक तनाव के कारण आंखों की मांसपेशियां तथा स्नायुओं पर दबाव पड़ता है। छोटी-मोटी नजर की दिक्कते ओवर वर्क, डर, चिंता आदि के कारण भी होते हैं।
गलत खान-पानः आंखें शरीर का एक अहम अंग हैं। यदि शरीर के सिस्टम में कोई गड़बड़ी होती है, तो उसका असर आंखों पर भी पड़ता है। आंखों को ज्यादातर वही बीमारियां अधिक प्रभावित करती हैं, जिनकी वजह से शरीर में विषाक्तता पैदा होती है।
विषाक्तता का मुख्य कारण है शरीर में कार्बोहाइड्रेट, शुगर और प्रोटीन का ज्यादा जमाव। दरअसल अंसतुलित और बहुत अधिक कंसेंट्रेटेड खाद्य पदार्थों के सेवन से मेटाबोलिज्म की क्रिया असंतुलित हो जाती है और इस वजह से आंखों के आस-पास की मांसपेशियों और रक्त नलिकाओं में रूकावट पैदा होने लगती है।
रक्त संचार और स्नायु सम्बन्धी गड़बड़ीः आंखों की रोशनी ठीक रखने के लिये जरूरी है कि उनमें रक्त संचार ठीक तरह से हो और स्नायुओं की संवेदनशीलता बनी रहे। यदि इनमें किन्हीं कारणों से कोई रूकावट पैदा होती है, तो इसका असर आंखों की रोशनी पर भी पड़ता है।
आंखों की कसरतः सिर को एकदम सीधा रखें। हिलाएं-डुलाएं नहीं। आराम से 6 बार ऊपर और 6 बार नीचे देखें। हर 2 सेकण्ड के अंतराल पर यही क्रिया दुहरायें।
गर्दन की कसरतः गर्दन को पहले गोलाकार, फिर अर्धगोलाकर घुमाएं। फिर कंधों को ऊपर उठाते हुये पहले घड़ी की दिशा में, फिर उसके विपरीत दिशा में कई बार गोल-गोल घुमाएं। गर्दन को आगे और पीछे की ओर झुकाएं। जितनी बार संभव हो, गर्दन को बायीं और दायीं ओर लटकाएं। इस क्रिया से गर्दन की जाम पड़ी मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं, जिनकी जकड़न की वजह से रक्त की आपूर्ति सिर में ठीक तरह नहीं हो पाती।
सूर्य की ओर देखें : सूर्योदय के समय सूरज की ओर मुंह करके किसी बेंच पर बैठें। फिर आंखों को बंद कर 18 मिनट तक गर्दन को अगल-बगल झुकाएं। फिर आंखों को खोलकर पलकें झपकाते हुये 10 बार सूर्य की ओर, फिर किसी हरियाली वाली जगह पर नजर दौड़ाए। इससे एक तो नजदीकी रोशनी बढ़ती है, दूसरे आंखों की जलन भी शांत होती है।
आंखों पर पानी के छीटें डालें : मुंह में पानी भर लें, आंखों को बंद करें। अब आंखों पर कई बार ठंडे पानी के छींटे मारे। फिर साफ तौलिए से पलकों को एक मिनट तक हल्के हाथ से घिसते हुए चेहरा पोंछ लें। दिन में चार-पांच बार ऐसा करें। इससे आंखों को ठंडक मिलती है और रक्त संचार प्रक्रिया में सुधार आता है।
पामिंगः हत्थे वाली किसी कुर्सी पर आंखें बंद कर आराम से बैठें। फिर दाहिनी हथेली से दायीं आंख को और बायीं हथेली से बायीं आंख को ढंकें। आंखों पर जोर न डालें। जिस समय आंखों को ढंकें, उस समय आपकी कुहनियां घुटनों पर होनी चाहिये।
घुटने आपस में सटे हों। फिर कल्पना करें कि आपके सामने जो काला अंधेरा छाया हुआ है, वह हर क्षण गहराता जा रहा है, काला से और काला—–और काला——। हथेलियों के सेंक से आंखों का तनाव घटता है। साथ ही आंखों और इनके इर्द-गिर्द के टिश्यूज रिलैक्स भी होते हैं।
पैरों पर खड़े होकर झूलें : खड़े हो जाएं, पैरों के बीच एक फुट की दूरी हो, दोनों हाथों को ढ़ीला छोड़ें। तन और मन, दोनों को रिलैक्स करें। अब एडि़यों को ऊपर उठाते हुये बारी-बारी से पूरे शरीर को बायीं और दायीं ओर धीरे-धीरे झुलाएं। ध्यान रखें, ऐसा करते समय पैर इधर-उधर न हिलें। कल्पना करें कि आप घड़ी के एक पेडुलम हैं और एकदम धीरे-धीरे इधर-उधर घूम रहें हैं।
यह क्रिया आप खिड़की या किसी तस्वीर के सामने कर सकते हैं। आप देखेंगे कि आप जिस दिशा में झुक रहे हैं, तस्वीर ठीक उसके विपरीत दिशा में झूलती सी लगेगी। जब आपकी नजर खिड़की या तस्वीर के अंतिम छोर पर पहुंचे, तो एक बार पलकें झपका लें। यह कसरत आंखों और नर्वस सिस्टम के लिये बेहद लाभदायक है।
खान-पानः आंखों के लिये सबसे बेहतरीन खान-पान तो वह होता है, जिसे आप प्राकृतिक रूप से बिना पकाये लेते हैं। जैसे- सेब, संतरा, अंगूर, किशमिश, चेरी आदि फल और बंदगोभी, पालक, शलजम, गाजर, प्याज, बीट आदि हरी सब्जियां। सभी सूखे फल, नट्स और दूध तथा दूध से बनी सामग्रियां भी बेहतर आहार की श्रेणी में आते हैं। गेहूं के चोकर युक्त आटे की रोटी सबसे बेहतर और सबसे उपयोगी है। नान, केक, पेस्ट्री, व्हाइट शुगर, व्हाइट ब्रेड, कॉन्फेक्शनरी, चाय, कॅाफी, मांस, मछली, अंडे आदि का सेवन करने से पाचन तंत्र असंतुलित होता है और शरीर में तमाम तरह की बीमारियां पैदा होने लगती है।
आंखों की सुरक्षा तथा नजर सम्बन्धी दोषों एवं आंख की अन्य बीमारियों को दूर करने में विटामिन ए प्रमुख भूमिका निभाता है। विटामिन ए के प्रमुख स्रोत हैं- कॅाड लीवर ऑयल, कच्चा पालक, शलजम, क्रीम, बटर, टमाटर, बंदगोभी, गाजर, सोयाबीन, हरी मटर, अंकुरित गेहूं, ताजा दूध, संतरा और खजूर।
योगासनः आंखों की रोशनी को बनाये रखने में योग अद्भुत योगदान दे सकता है। खास तौर पर 10 मिनट कपाल भांति और 10 मिनट अनुलोम-विलोम करने से कुछ महीनों में चश्मा तक उतरने की संभावना होती है। आंखों के लिये रोजाना त्रटक करना भी बेहद कारगर हैं, योगासनों में भुजंगासन, शलभासन, योगमुद्रा और पश्चिमोत्तानासन आंखों के लिये विशेष रूप से फायदेमंद है। जलनेति क्रिया भी आंखों के लिये लाभकारी है। लेकिन ये सभी योग क्रियायें किसी योग-शिक्षक के परामर्श पर ही करें। एक्यूपंचरः दोनों हाथों की तर्जनी और अनामिका के बीच बारी-बारी से एक मिनट तक दबाएं और छोड़ें। ऐसा दिन में 3-4 बार करें। कुछ ही समय बाद अद्भुत लाभ प्राप्त होगा।
आंखों का जो महत्व हमारे जीवन में है, उससे हम भलीभांति परिचित हैं। बिना नेत्र ज्योति के मनुष्य जीवन की कल्पना ही व्यर्थ है। ज्योतिष में सूर्य को नेत्र ज्योति का कारक माना गया है।
नेत्र ज्योति से ही सम्पूर्ण संसार के रंगों का हम आनन्द ले पाते हैं। नेत्र ज्योति के द्वारा ही हमारी सभी क्रियायें निरन्तर उचित अनुपात में क्रियाशील हो पाती है। इसलिये ईश्वर द्वारा प्रदत्त इस अनमोल ज्योति को हमें सुरक्षित, अक्षुण्ण व प्रभावशाली बनायें रखने के लिये हमेशा इसका धयान रखना चाहिये।
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