





तुलसी भारतीय संस्कृति में यह नाम तथा इसके पौधे को गंगा, यमुना के समान पवित्र माना गया है। समुद्र मंथन के समय जब अमृत निकला तो कलश को देखकर श्रम की सार्थकता से वशीभूत होकर देवताओं के नेत्रों में अश्रुभाव हो उठे जिनकी बूंदों से यह पवित्र व देवतुल्य तुलसी प्राप्त हुआ।
भारतीय इतिहास में प्रत्येक घर में तुलसी के पौधे लगाने की परंपरा है। घर की महिलायें प्रतिदिन इसकी पूजा कर अपने घर को पवित्र व दिव्य वातावरण से आप्लावित करती है। तुलसी के औषधीय गुणों के साथ ही दिव्यतम आध्यात्मिक गुण भी है, इस देव दुर्लभ पौधे को आप अपने निवास स्थान पर लगाकर उचित प्रभाव पा सकते हैं।
परम पावन आध्यात्मिक गुण
वस्तुतः इस देवतुल्य पौधे के स्थापन मात्र से ही व्यक्ति के ब्रह्म हत्या जैसे घोर पाप भी समाप्त हो जाते हैं।
जो परिवार की स्त्रियाँ नित्य प्रातः स्नान कर गुरू पूजन पश्चात् तुलसी के पौधे के नीचे दीपक प्रज्जवलित करती है तथा धूप दिखाती है, उस महिला के घर में पूर्ण श्री की वृद्धि, कुल में अभिवृद्धि होती है तथा गृह दोष व देव दोष जैसे अभिकारक जिससे हमारे जीवन में बाधायें, विपत्ति जैसी स्थिति निर्मित होती है वे स्वतः ही इस देव पौधे के लगाने से समाप्त हो जाती है।
एक गमले में तुलसी के पौधे को तथा एक गमले में काली धतूरे का पौधा लगायें तथा प्रातः स्नानादि के पश्चात् किसी शुद्ध पात्र में शुद्ध जल व थोड़ा दूध मिलकार नित्य एक वर्ष तक अर्पण करने से समस्त पितृ-ऋण समाप्त हो जाते हैं तथा पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है यह ध्रुव सत्य है।
किसी शुभ कार्य में जाने से पूर्व या घर से निकलने से पूर्व तुलसी के पौधे का दर्शन ही कल्याणकारी होता है।
शास्त्रों में तुलसी को वन्दनीय व पूजनीय माना गया है। इन्हें हरिप्रिया, वृंदा आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है। हरिप्रिया होने के कारण विष्णु-लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा जाता है। जिस घर में तुलसी की नित्य पूजा, आराधना होती है, वहाँ निश्चित ही लक्ष्मी का वास होता है, साथ ही परिवार में प्रसन्नता और आरोग्यमय स्थितियाँ बनती है।
वातावरण को शुद्ध करने में तुलसी का अद्भुत योगदान है। तुलसी शारीरिक व्याधियों को दूर करने वाली बहुपयोगी वनस्पति है। साथ ही तुलसी को नित्य अर्घ्य प्रदान करने से मन निर्मल होता है व भावो एवं विचारों में पवित्रता आती है।
भारतीय संस्कृति में तुलसी को मातृ स्वरूपा माना गया है। सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लगभग सभी घरों में नित्य तुलसी की पूजा, आराधना सम्पन्न कर ही दैनिक कार्यों में प्रवेश किया जाता है, कुछ भारतीय स्त्रियाँ तो ऐसी भी हैं जो बिना तुलसी को अर्घ्य दिये जल भी नहीं ग्रहण करती।
परन्तु यदि परम्पराओं के निर्वाह के स्थान पर पूर्ण विधान से पूजन सम्पन्न किया जाये तो साधक गण कोटि गुणा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसी हेतु तुलसी पूजन के विधान को प्रथम बार आपके सम्मुख प्रस्तुत किया जा रहा है। इस विधान को आप अपने दैनिक क्रियाओं में सम्मिलित कर मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बन सकेंगे। साथ ही आपको यह बताना आवश्यक है कि वंदनीय माता जी के दैनिक कार्यों का प्रारंभ तुलसी पूजा से ही होता है। शिष्य-शिष्याओं को प्रेरणा स्वरूप इन्हीं मातृ शक्ति स्वरूपा भगवती के जीवन का अनुसरण निश्चित रूप से करना चाहिये।
तुलसी पौधे की स्थापना ऐसी जगह पर हो जहाँ स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा सके। उस स्थान को हमेशा स्वच्छ व पवित्र बनायें रखें। तुलसी के पत्तों को स्वच्छ बनायें रखने के लिये नित्य उस पर पानी के छीटें डालते रहें। तुलसी पौधे के सामीप्य एक शिला (चबूतरा) पर शालिग्राम विग्रह का स्थापन आवश्यक माना जाता है।
सर्वप्रथम शालिग्राम विग्रह व तुलसी को चंदन, अक्षत, धूप, दीप, लाल पुष्प अर्पित करें।
पश्चात् तुलसी स्तुति करें-
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः, नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुये तुलसी को अर्घ्य दें-
महाप्रसाद जननीये सर्व सौभाग्यवर्धिनी। आधि-व्याधि हरा नित्यंये तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
तुलसी वंदना करें-
तुलसी श्रीमहालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनः प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्। तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पत्नी श्रीहरप्रिया।।
पूर्णता के साथ तुलसी नामाष्टक का पाठ करें-
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। यः पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
तुलसी का प्रतिदिन पूजन करने से घर में धन, सम्पदा, वैभव, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही परिवार का प्रत्येक सदस्य कुशल व आरोग्य जीवन प्राप्त करता है और प्राण शक्ति की वृद्धि होती है।
अतः आप सभी साधकों से अनुरोध है कि – प्रकृति तथा देवताओं के इस वरदान स्वरूप पौधे को अवश्य ही आप अपने निवास स्थान पर लगायें, जिससे आपके घर व परिवार में साधनात्मक, प्रेममय व पवित्रता का वातावरण बन सके।
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