





होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं है अपितु जीवन में सब कुछ मन के अनुरुप प्राप्त कर लेने का श्रेष्ठतम मुहुर्त है। होली और चन्द्रगहण के दुर्लभ अवसर पर तेजमय चेतना से आपूरित होने का क्षण है। भौतिक व आध्यात्मिक जीवन की आधार शक्ति को पूर्णरुपेण आत्मसात् करने हेतु तथा सभी संतापों, दोषों, कालसर्पमय दुखद स्थितियों को भस्म करने का उत्सव है। जिससे सम्पूर्ण जीवन में आनन्द, मस्ती, हर्ष, उल्लास, उमंग और उर्जा से आपूरित रहा जा सकता है तथा आत्मा की शुद्धि भी की जा सकती है।
होलिका पर्व पर की जाने वाली साधना से जीवन के समस्त रोग, शोक, कष्ट, पीड़ा तथा विभिन्न प्रकार की अनर्गल तंत्र क्रियाओं का निवारण प्राप्त होता है। साथ-ही-साथ यह नकारात्मकता और बुराइयों के अंत का भी प्रतीक है। विकारों से बदरंग बनी आत्माओं को अपने ज्ञान-चेतना और अपने तपोबल से अर्जित की हुई साधनात्मक शक्तियों के माध्यम से सद्गुरुदेव जी उन्हें उजला बनाकर उनमें ज्ञान, शांति, प्रेम, सुख, आनंद, पवित्रता, शक्ति आदि गुण भरकर देवतुल्य बना देते हैं। अतः इस अद्भुत क्षण में सद्गुरुदेव जी से “चन्द्र ग्रहण युक्त होलिका दीक्षा” लेने से साधक का जीवन उक्त सुस्थितियों से परिपूर्ण तो होगा ही, साथ ही जीवन परमात्म रंगों से रंगीन तथा उल्लासमय भी हो सकेगा।
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पराजय का तात्पर्य है, पीड़ा, हानि, नुकसान, बाधा, विरोध, कार्य में अपूर्णता, अपमान इत्यादि। यदि कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है तो वह आपकी पराजय है और बार-बार पराजय मिलती है तो उत्साह भी समाप्त हो जाता है। पराजित होने का तात्पर्य है, आप पर कोई हावी हो रहा है, आप दब कर जी रहे हैं और ऐसा जीवन में होता है। अपराजेय होने का तात्पर्य है कि आपके दोष दूर हों जाये, आप स्वयं को पहचान सकें, अपने संकल्प के अनुसार कार्य कर सकें, आपके शत्रु यदि आपको हानि पहुंचाने का प्रयास करें तो आपको हानि न पहुंचे, जो भी शत्रु ऐसा करने का प्रयास करें, वह स्वयं में ही इतना पीड़ित हो जाये कि उसका ध्यान ही आप पर ना जाये। प्रत्येक व्यक्ति को सफलता नहीं मिल पाती, वह जी तोड़ परिश्रम करने के बाद भी जीवन में सफल नहीं हो पाता। जिस हिसाब से प्रति वर्ष उन्नति होनी चाहिये, नहीं हो पाती है, केवल व्यापार प्रारम्भ कर देने से या नौकरी पर जाने से ही भौतिक संपदा नहीं आती है। इसके लिये किसी दैवीय ऊर्जा शक्ति की भी आवश्यकता पड़ती है। मनुष्य को यह जीवन इसलिये प्राप्त हुआ है, कि वह इस जीवन में पूर्णता प्राप्त करे, अपने जीवन में इन्द्रधनुष के समान सभी रंगों को देखे, उन्हें अनुभव करे और इन अनुभवों को ग्रहण करने के पश्चात् जीवन में प्रगति के उस स्तर पर पहुंच जाये कि उसे पूर्ण संतुष्टि प्राप्त हो सके।
ऐसे ही पूर्ण फलदायी ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, नीति, प्रेम, षोड़ष शक्तियों से युक्त महातारा जयन्ती का पर्व निश्चित रूप से आपके भीतर पूर्ण आत्मविश्वास भरने में सहाय है, आपके एक-एक अणु को क्रियाशील करने में समर्थ है और चेतना शक्ति का सही उपयोग आपको पूर्ण क्रियाशील बनाकर उन्नति के विशेष मार्ग की ओर ले जाता है। आप गृहस्थ जीवन के हर क्षेत्र में कर्म शक्ति से युक्त जीवन में रोग-शोक, संताप, दुःख को समाप्त करने और शुद्धता, पवित्रता, सत्यता एवं षोड़श शक्ति युक्त तारा धनदा लक्ष्मी शक्ति से प्रगति के नये मार्ग की ओर अग्रसर हो सकेंगे।
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