





किसी पूर्णमासी के दिन इन्द्राक्षी यंत्र-स्थापन करें। बाजोट पर पीला कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर गुलाब के पुष्प रखकर इन्द्राक्षी यंत्र को स्थापित करें, फि़र इस स्तोत्र का पाठ करें। नित्य एक बार या पांच बार पाठ करने से कुछ ही दिनों में जीवन में अनुकूलता आने लगती है और सभी दृष्टियों से सम्पन्नता प्राप्त होती है।
विनियोग
ऊँ अस्य श्री इंद्राक्षी स्तोत्र महामंत्रस्य श्री शचि पुरन्दर ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः श्री
इन्द्राक्षी देवता महालक्ष्मी बीजं भुवनेश्वरी शक्तिः लक्ष्मी कीलकं मम श्री
इंन्द्राक्षी प्रसाद सिद्धयर्थे मम मनोकामना सिद्धय विनियोगः।
इंद्राक्षी ध्यान
नेत्रणं दशभिः शतैः परिवृताम्, अत्युग्र मर्यावराम
हेमांभां वहति विलम्वित् शिखै र्मामन्त के शांविलां।।
घण्टा मण्डित पाद पद्म युगलां नागेन्द्र कुम्भस्तनी।
इन्द्राक्षी परिचितन्तयामि मनसः कल्पोत सिद्धि प्रदाम।।
इन्द्राक्षी द्विभुजां देवि, पीत वस्त्र द्वयांवितां,
वाम हस्ते कमलधराम् दक्षिणेनवरप्रदाम्।
इन्द्रार्दिभी सुरैर्वन्दयाम् वन्दे शंकरवल्लभाम्
एवम् ध्यात्वा महादेवि पठामि सर्व सिद्धये।।
ऊँ ऐं श्रीं श्रीं हुं हुं इन्द्राक्षी माम् रक्ष रक्ष, मम शत्रून् नाशश् नाशय,
जलरोधम शोषय शोषय दुःखं व्याधिं स्फोटय स्फोटय, दुष्टादि
भंजय भंजय मनोग्रन्थिम् प्राण ग्रन्थिम रोग ग्रन्थिम घातय घातय
इन्द्राक्षी माम्रक्ष रक्ष हुं फट् स्वाहा।
ऊँ नमो भगवती प्राणेश्वरी प्रत्यक्ष सिंह वाहिनी महिषासुर मर्दिनी,
उष्ण ज्वर पित्त वात ज्वर श्लेष ज्वर, कफ ज्वर आजाल ज्वर, सिन्नपात
ज्वर माहेन्द्र ज्वर सत्योदि ज्वर एकांन्विक ज्वर, द्वयान्विक ज्वर संवत
सर ज्वर सर्वांग ज्वर नाशय नाशय, हर हर हन हन दह दह पच पच
तालय तालय आकर्षण विद्वेषय विद्वेषय स्तम्भय स्तम्भय मोहय मोहय
उच्चाटय उच्चाटय हुं फट्।
ऊँ नमो भगवति माहेश्वरी महाचिन्तामणि सकल सिद्धेश्वरी सकल
जन मनोहारिणी काल रात्रि अनले अजिते अभये महाघोर प्रतीतय
विश्वरूपिणी मधुसूदनी महाविष्णु स्वरूपणि, नेत्रशूल कटिशूल
वक्षशूल पाण्डुरोगादि नाशय नाशय, वैष्णवी ब्रह्मास्त्रेण
विष्णु चक्रेण रूद्र शूलेण यमदण्डेन वरूण वज्रेण वाशववज्रेण
सर्वान्अरिम् भंजय भंजय, यक्ष ग्रह राक्षय ग्रह स्कन्द ग्रह विनायक
ग्रह बाल ग्रह चौर्य ग्रह कूष्माण्ड ग्रहादीन निग्रहा राज्य
क्षमा क्षयरोग ताप ज्वर निवारिणि मम सर्व शत्रून्
नाशय नाशय, सर्व ग्रहान् उच्चाटय उच्चाटय हुं फट्।
महालक्ष्मी महादेवी सर्व रोग निवारिणी। सर्वपाप हरो देवि महालक्ष्मी नमोस्तुते।
विनियोग
इस इन्द्राक्षी महामंत्र का शची पुरन्द ऋषिः, अनुष्टुप, छन्दः इन्द्राक्षी देवता, महालक्ष्मी बीजं, भुवनेश्वरी शक्तिः, लक्ष्मी कीलक मैं इन्द्राक्षी भगवती की कृपा प्राप्ति एवं मनोकामना पूर्ति के लिए इसका पाठ कर रहा हूं।
ध्यान
दस हजार नेत्रों वाली, अति उग्र तेज युक्त स्वर्ण के समान आभायुक्त लम्बे केशों से सुशोभित, दोनों पैरों में घुंघरूओं से युक्त, स्थूल स्तनों वाला, भगवती इन्द्राक्षी की सिद्धि प्राप्ति हेतु सतत् ध्यान करता हूं।
हे देवी! आप दो भुजाओं से युक्त हैं, पीत वस्त्रों से सुशोभित बायें हाथ में कमल धारण किए हुए, दायें हाथ से साधकों को वर प्रदान करने वाली, इन्द्र आदि देवताओं द्वारा वन्दित, शंकर की प्रिया, आपके इस दिव्य स्वरूप का मैं निरन्तर ध्यान करता हूं।
स्तोत्र
‘ऊँ ऐं श्रीं श्रीं हुं हुं’ हे इन्द्राक्षी! आप मेरी रक्षा करें।
मेरे शत्रुओं का नाश करें। अनिष्ट को दूर करें, दुःख एवं व्याधियों का नाश करें, दुष्टों का नाश करें। मनोग्रन्थि, प्राणग्रन्थि, रोगग्रन्थि को दूर करें। हे भगवती! आप मेरी रक्षा करें।
हे भगवती इन्द्राक्षी! आप प्राणों को ऊर्जा देने वाली, सिंहवाहिनी, महिषासुर मर्दिनी, उष्ण ज्वर, पीत जवर, स्लेश्म ज्वर, कफ ज्वर, आजाल ज्वर, सिन्नपात ज्वर, महेन्द्र ज्वर, शक्तियोदि ज्वर, आधे दिन का ज्वर, दो दिवसीय ज्वर, वार्षिक ज्वर आप सम्पूर्ण ज्वरों का नाश करें, हरण कीजिये, हनन कर दें, समाप्त कर दें। आकर्षण, विद्वेषण, स्तम्भन, मोहन एवं उच्चाटन कर दें।
हे भगवती माहेश्वरी! आप सकल सिद्धियों को देने वाली हैं, चिन्तित कामनाओं को शीघ्र प्रदान करती है। सभी लोगों की आप प्रिय हैं। हे कालरात्रि! अग्नि स्वरूप, कभी परास्त ना होने वाली, अभय प्रदान करने वाली, महाघोर रूप वाली विश्वस्वरूपिणी, माधुर्य युक्त तथा आप विष्णु स्वरूपा हैं।
नेत्र शूल, कर्ण शूल, कमर शूल, छाती शूल तथा पीलिया आदि रोगों का नाश करें। हे वैष्णवी! ब्रह्मास्त्र से, विष्णु चक्र से, रूद्र त्रिशूल से, यम दण्ड से, वरूण देवता वज्र से, इन्द्र देवता इन्द्र वज्र से, सभी शत्रुओं का नाश करें, भंजन करें।
हे भगवती! यक्ष ग्रह, राक्षस ग्रह, स्कन्द ग्रह, विनायक ग्रह, बाल ग्रह, चोर ग्रह, उष्माण ग्रह, मूक ग्रह आदि सभी ग्रहों को नियन्त्रित करें। राज यक्ष्मा, क्षय रोग तथा ताप ज्वरों का निवारण करें, मेरे सभी शत्रुओं का नाश करें तथा सभी शत्रु ग्रहों का उच्चाटन करें।
सभी रोगों को दूर करने वाली समस्त पापों का शमन करने वाली भगवती महालक्ष्मी को मैं नमन करता हूं। मुक्ता, विद्रूम स्वर्ण तथा स्वच्छ जल के समान, धवल शोभा युक्त मुखों से संतोष प्रदान करने वाली, चन्द्र मणि से सुशोभित, मुकुट धारण की हुई, ब्रह्मत्व स्वरूप को प्रकट करने वाली, हाथों से अभय प्रदान करने वाली, स्वच्छ स्वर्ण पात्र, शंख चक्र तथा कमल दल को हाथों में धारण की हुई लक्ष्मी का मैं ध्यान करता हूं।
‘ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं’ सभी दुःखों को नाश करने वाली, दरिद्रता को दूर करने वाली, सभी कष्टों को दूर करने वाली, सभी सुखों को देने वाली, सभी सौभाग्य को देने वाली है भगवती महालक्ष्मी! मेरे घर में पधारिये तथा सौभाग्य प्रदान कीजिये। सौभाग्य के साथ यश, मान, पद प्रतिष्ठा एवं ऐश्वर्यता प्रदान कीजिये। हे भगवती इन्द्राक्षी! आपको बारम्बार नमन करता हूं।
ऐसा कहकर हाथ जोडें और ‘भगवती महालक्ष्मी इन्द्राक्षी’ की आरती करें। इस प्रकार से यह इन्द्राक्षी स्तोत्र अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है और नित्य इसका पाठ करना सौभाग्यदायक माना गया है।
It is mandatory to obtain Guru Diksha from Revered Gurudev before performing any Sadhana or taking any other Diksha. Please contact Kailash Siddhashram, Jodhpur through Email , Whatsapp, Phone or Submit Request to obtain consecrated-energized and mantra-sanctified Sadhana material and further guidance,