





‘‘शक्ति ज्योतिचक्र’’ को साधक द्वारा धारण करने से वह अपनी शक्तिहीनता, नपुसंकता में आमूल-चूल परिर्वतन की स्थिति प्राप्त कर अपने जीवन को सुरक्षात्मक तथा कामदेव शक्ति से युक्त बनाने में समर्थ हो सकेगा।’’
किसी प्रकार की बीमारी, परेशानी, राज्य बाधा, या कठिनाई नहीं आये, किसी प्रकार की अकाल मृत्यु या बीमारी व्याप्त न हो। यह तीन धातुओं से निर्मित अपने आप में दुर्लभ, महत्वपूर्ण और अद्वितीय कड़े के रूप में है जिसे आसानी से अपनी कलाई में धारण किया जा सकता हैं। जब इसका स्पर्श शरीर से होता है तो पूरी देह एक विशेष सुरक्षा से रक्षित हो जाती है और किसी प्रकार की पीड़ा, अड़चन, बीमारी या तकलीफ यथा सम्भव परेशान नहीं करती।
यह नव शक्ति ज्योतिचक्र विशेष मंत्र सिद्ध चैतन्य और प्राण प्रतिष्ठा युक्त है। शुक्राचार्य प्रणीत प्राण संजीवनी क्रिया से पूर्ण विधि-विधान से निर्मित किया गया है। जिससे पहिनने वाले व्यक्ति की सभी दृष्टियों से पूर्ण सुरक्षा हो सकें।
नवरात्रि का यह विशेष पर्व अपने भीतर से अज्ञानता, दोष, कमियां, निकाल बाहर कर अपने भीतर शक्ति भरने का पर्व है, यदि संसार विपत्ति सागर है, तो उसमें से पूर्ण रूप से बाहर निकलने के लिये शक्तिवान होना ही पड़ेगा, अपने भीतर शक्ति सामर्थ्य भरनी पड़ेगी, यह शक्ति ही अपने अलग-अलग रूपों में विद्यमान हो कर साधक के कार्य सम्पन्न करती है।
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