





सूर्यवंशी प्रभु श्री राम ने अपने जीवन चक्र द्वारा सदा धर्म के मार्ग पर चलकर कर्तव्य परायणता का मार्ग प्रशस्त किया। रघुकुल में जन्म लेने के पश्चात् भी श्री राम का जीवन कठिनाईयों से भरा था जिसका उन्होंने एक सुपात्र एवं योग्य पुत्र, पति, भाई के रूप में निर्वहन किया।
प्रभु श्रीराम स्वभाव से शांत, सौम्य, व सदाचारी थे। उनके लिये वचन बद्धता सर्वोपरी थी। श्रीराम ने सभी जीवों के प्रति दयालु रहना भी सिखाया । वे न्यायप्रिय एवं अपनी प्रजा से अत्यन्त प्रेम करने वाले एक कुशल एवं साहसी राजा थे।
भगवान श्रीराम की उपासना-साधना से साधक अपने जीवन पथ पर अडिग होकर समस्त कर्त्तव्यों का निर्वाहन करते हुये नेतृत्व क्षमता व निर्णायक क्षमता में उत्तरोत्तर विकास कर जीवन की समस्त विकट व असमंजस रूपी स्थितियों का विनाश करने में सक्षम बनता है।
सर्व दुर्गतिनाशक पथप्रदर्शक श्रीराम शक्ति साधना
साधना सामग्री-सर्वदुर्गतिनाशक माला, नारायण शक्ति गुटिका
किसी भी गुरुवार को प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर शुद्ध पीला वस्त्र धारण कर उत्तर दिशा की ओर मुंह कर, पीला आसन बिछाकर पूजा स्थान में बैठ जायें। सर्व प्रथम गणेश/गुरु का संक्षिप्त पूजन कर 4 माला गुरु मंत्र का जाप करे।
अपने सामने लकड़ी के बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर किसी पात्र में ‘‘नारायण शक्ति गुटिका’’ को स्थापित कर कुंकुम, अक्षत, धूप-दीप, अगरबत्ती से पंचोपचार पूजन सम्पन्न करें। फिर विनियोग व ध्यान का उच्चारण करें-
विनियोग-
अस्य राम मंत्रस्य, ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्री रामो देवता, रां बीजम्, नमः शक्तिः, चतुर्विध पुरूषार्थ सिद्धये जपे विनियोगः।
ध्यान–
नीलांभोधरकांतिकांतमनिशं वीरासनाध्यासिनम्। मुद्रां ज्ञानमयीं दधानमपरं हस्तांबुजं जानुनि।
सीतां पार्श्वगतां सरोरुहकरां विद्युन्निभां राघवम्। पश्यंतीं मुकुटां गदा दिवि विधा कल्पोज्ज्वलांगं भजे।।
इसके बाद ‘‘सर्व दुर्गतिनाशक माला’’ से निम्न मंत्र का 11 माला मंत्र जप नित्य तीन दिवस तक करें।
मंत्र
।। रां रामाय नमः ।।
तीसरे दिन का जप सम्पन्न होने के उपरांत गुरू आरती सम्पन्न करें। नारायण शक्ति गुटिका को दोनों हाथों में उठाकर सिर व दोनों भौंहों के मध्य स्पर्श कराकर गुटिका को रेशमी धागे में पिरोकर गले में धारण करें। अन्य साधना सामग्री को पीले वस्त्र में बांध कर किसी पवित्र जलाशय या नदी में प्रवाहित कर दें। गुटिका धारण करने के पश्चात् मृतक कार्यो में भाग लेने से पूर्व उतार दें। रजस्वला स्त्री एवं कुत्ते से स्पर्श न होने दें। 3 महिने पश्चात् गुटिका को नदी में विसर्जित कर दें।
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