





तो इस बार हम जानेंगें कि घर की दहलीज पर चहुंमुखी दीपक लगाने का कारण, इसके नियम व इससे साधक के गृहस्थ जीवन पर पड़ने वाले सुप्रभाव।
चहुंमुखी यानि कि चार बत्ती वाले दीपक लगाते क्यों है, इसके नियम एवं लाभ-
चहुंमुखी दीपक अर्थात् चार बत्तीयों वाला दीपक घर की चार दिशाओं की ओर सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार का साक्षी है। इस दीपक को प्रतिदिन घर की लक्ष्मी अर्थात् मुखिया स्त्री संध्याकाल में प्रज्जवलित करती है तो गृहस्थ जीवन में शांतिपूर्ण वातावरण स्थापित होना आरंभ हो जाता है, साथ-ही-साथ रिश्तों में मिठास दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है।
यदि साधिकायें भी गृहस्थ सुख-शांति के लिये यह चहुंमुखी दीपक का प्रज्जवलन आरंभ करना चाहती है तो इसकी शुरूआत एकादशी की संध्या से करें। यह दीपक घर की दहलीज पर दक्षिण दिशा में लगायें और ध्यान रहे कि जो महिलायें दीपक लगा रही हैं उनका स्वयं मुख उत्तर दिशा की ओर हो।
ध्यान रहे मिट्टी के दीपक का प्रयोग एक ही बार करें अगले दिन नये दीपक पर चार लम्बी बत्ती लगाकर प्रतिदिन नवीन दीपक प्रज्जवलित करें। दीपक कभी भी सीधे फर्श पर न रखें, हमेशा तांबे की प्लेट या फिर अक्षत बिछाकर उस पर रखें क्योंकि दीपक देव-तुल्य है जिसे बिना आसन के नहीं रखा जाना चाहिये। दीपक में तिल के तेल का प्रयोग करें एवं शनिवार, मंगलवार को सरसों का तेल प्रयोग में लें। साथ-ही-साथ यह भी ध्यान में रखने वाली बात है कि दीपक में तेल के अलावा अक्षत, 2 काली मिर्च, 2 लौंग, काले तिल(राहु ग्रह शांति के लिये विशेष), हल्दी की 1 छोटी गांठ, 2 इलायची, मिश्री के दाने या फिर काली/पीली सरसों इन सामग्री में से कम-से-कम एक सामग्री अवश्य ही रखें। क्योंकि इनसे पितृ दोष, भूत-प्रेत बाधा, नजर दोष बाधा का निस्तारण होता है। घर में सुखद-शांतिपूर्ण माहौल व्याप्त होना आरंभ हो जाता है, पति-पत्नी के बीच मधुर संबंध स्थापित होने लग जाते हैं, बच्चों पर बुरी नज़र का प्रभाव समाप्त होना शुरू हो जाता है, साथ ही उनका मन पढ़ाई में लगने लग जाता है। मार्गशीर्ष माह भगवान कृष्ण एवं भगवती लक्ष्मी का प्रिय मास है, इसीलिये चहुंमुखी दीपक के प्रज्जवलन का आरंभ इसी माह की एकादशी से किया जाये तो अति उत्तम फलदायी सिद्ध होता है।
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