





मातंगी शब्द जीवन के प्रत्येक पक्ष को उजागर करने की क्रिया का नाम है। जीवन के सैकड़ों पक्ष है, जहां भौतिक पक्ष है- स्वास्थ्य, आय, धन, कुटुंब सुख, पत्नी, पुत्र, पुत्रियां, गृहस्थ सुख, पूर्णायु आदि कई प्रकार की पूर्ति वैसे ही आध्यात्मिक पक्ष भी हैं- कुण्डलिनी जागरण, ध्यान, समाधि, अपने ईष्ट के दर्शन, आने वाले भविष्य को देखने की क्षमता, किसी भी व्यक्ति के भूत काल को परखने की पहचान और अंत में सिद्वाश्रम की प्राप्ति।
ये सभी क्रियाएं, ये सभी स्थितियां केवल मातंगी साधना की सिद्वि से ही प्राप्त हो सकती है। यदि हम मातंगी साधना को भली प्रकार से सम्पन्न कर लें, तो निश्चय ही ये सारी स्थितियां स्वतः ही प्राप्त हो जाती हैं।
विश्वामित्र ने कहा है- बाकी नौ महाविद्याओं का भी समावेश मातंगी साधना में स्वतः ही हो गया है। चाहे हम बाकी नौ साधनायें नहीं भी करें और केवल मातंगी साधना को ही संपन्न कर लें, तो भी अपने आप में पूर्णता प्राप्त होती है। शास्त्रों में मातंगी साधना को सर्वोच्चता और श्रेष्ठता दी गई है।
मातंगी साधना को संपन्न करने के बाद साधक शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तीनों ही दृष्टियों में पूर्ण स्वस्थ, सुखी और सम्पन्नता से राज-राजेश्वरी युक्त जीवन प्राप्त कर सकता है और गृहस्थ जीवन भी पूर्णतः सुखमय होता है, अतः इस प्रयोग के द्वारा साधक सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति करने में सक्षम हो जाता है।
इस साधना को मातंगी जयंती या किसी भी मंगलवार अथवा रविवार के दिन संपन्न कर सकते हैं। इस साधना को कोई भी स्त्री या पुरूष सिद्ध कर सकता है।
साधना विधान
साधक को चाहिये कि वह सूर्योदय से पूर्व भोर काल में स्नान आदि से निवृत्त हो, उत्तर दिशा की ओर मुख कर, आसन पर बैठ जाये और अपने सामने गुरू चित्र और राज-राजेश्वरी दरिद्रता विनाशक मातंगी यंत्र एक लकड़ी के बाजोट पर स्थापित कर दे तथा उनका कुंकुम, अक्षत, धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य, आदि से पूजन सम्पन्न करें।
फिर साधक वैभव लक्ष्मी जीवट को आसन के नीचे दबाकर 1 माला गुरू मंत्र जप सम्पन्न करें तथा राज-राजेश्वरी माला से 25 मिनट तक निम्न मंत्र का जप करें-
मंत्र
।। ऊँ ह्रीं ऐं श्रीं नमो राज राजेश्वरी भगवति श्री मातंगेश्वरि सिद्धये फट्।।
( Om Hreem Ayem Shreem Namo Raj Rajeshwari Bhagwati Shree Matangeshwari Sidhaye Phat )
ऐसा तीन दिन तक करें, तीन दिन बाद मंत्र जप सम्पन्न होने के पश्चात् गुटिका, यंत्र एवं माला को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इसमें साधक पीले वस्त्र धारण करें। इस प्रकार यह प्रयोग पूर्ण हो जाता है और साधक को यथा शीघ्र अनुकूल फल प्राप्त होने लगते हैं, आवश्यकता है, साधना में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ मंत्र-जप सम्पन्न करने की ।
राज-राजेश्वरी वैभव लक्ष्मी मातंगी दीक्षा प्राप्त करने से सांसारिक जीवन में लक्ष्यों की प्राप्ति और शारीरिक बल, शक्ति, ऊर्जा और चेतना की प्राप्ति होती है। इस दीक्षा के माध्यम से कार्य सुगम और सरलता से बन जाते हैं। आप स्वयं अनुभव करेंगे कि जो काम आप पिछले कई वर्षों में नहीं कर सके, वो कुछ ही दिनों में पूर्ण करने में सफल हो जाते हैं।
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