





भगवान विष्णु ने धर्म और न्याय की पुनर्स्थापना करने के लिये राजा पृथु के रूप में अवतार लिया था। यह अवतार लेने के पीछे भगवान विष्णु का उद्देश्य प्रकृति की रक्षा व समस्त जगत को शांतिपूर्वक चलायमान करना था। राजा पृथु एक दयालु, दृढ़ संकल्पी पुरूष थे, जिन्होंने अपनी प्रजा के लालन-पालन के लिये पृथ्वी का दोहन किया व अन्न, वनस्पति, औषधि, धन-धान्य उपलब्ध कराये।
मनुष्य जीवन में भी कई ऐसे पड़ाव, स्थितियां एवं बाधायें आती हैं जिनका समाधान करने के लिये महाराज पृथु की ही भांति दृढ़ संकल्पित, निष्ठावान बनना होता है। फिर चाहे वह विद्यार्थी जीवन में किसी परीक्षा में कुशलता पूर्वक उत्तीर्ण होना हो, नौकरी के लिये इंटरव्यू देना होना हो, कोई नया व्यवसाय आरंभ करना हो या कोई और क्षेत्र, आत्मबल, धैर्य, संकल्पवान होकर ही जीवन के इन सभी पड़ावों को सफलता के साथ पार किया जा सकता है।
श्री विष्णु आत्मतेज संकल्प शक्ति वृद्धि दीक्षा प्राप्त कर साधक जीवन में आत्मविश्वास, इच्छा शक्ति में वृद्धि होती हुई अनुभव कर सकेंगे।
श्री विष्णु आत्मतेज संकल्प शक्ति वृद्धि साधना विधि
साधक किसी भी गुरूवार व एकादशी के दिन प्रातः 6 बजे स्नानादि से निवृत्त होकर अपने साधना कक्ष में प्रवेश करें, पूर्व दिशा की ओर मुंह कर पीले आसन पर बैठ जायें, सामने चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर कुंकुम से ‘ऊँ’ बनायें, उस पर ‘नारायण दिव्य चैतन्य यंत्र’ स्थापित करें, बायीं ओर अष्टगंध की छोटी सी ढ़ेरी पर ‘आत्म ज्ञान शक्ति जीवट’ स्थापित कर दें, इसके पश्चात् गणपति व गुरुदेव का संक्षिप्त पूजन कर, सद्गुरुदेव का ध्यान-प्रार्थना करें-
त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम् देव देव।।
पश्चात् यंत्र व जीवट का पूजन कुंकुम, अक्षत, पुष्प से करें और घी का बड़ा दीपक प्रज्ज्वलित करें, जिसकी ज्योति का प्रकाश अपने चेहरे पर स्पष्ट से पड़ती रहे, साधना काल तक दीपक प्रज्ज्वलित रहना अनिवार्य है। 5 मिनट तक प्राणायाम कर मन को शांत करें, फिर भगवान विष्णु से प्रार्थना कर आत्मतेज व संकल्प शक्ति वृद्धि हेतु ध्यान करें-
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्। विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
इसके पश्चात् ज्ञान शक्ति माला से 5 माला मंत्र जप सात दिवस तक करें-
मंत्र
।। ऊँ ह्रीं आत्म चैतन्यै ह्रीं फट् ।।
सात दिन पश्चात् ज्ञान शक्ति माला धारण कर लें, अन्य सामग्री को किसी पवित्र जलाशय अथवा नदी में विसर्जित कर दें, व गुरुदेव से मिलकर आशीर्वाद् प्राप्त कर माला गुरुदेव के चरणों में अर्पित कर दें।
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