





जब सावित्री ने अपने पति की मृत्यु को टाल दिया था, जब स्वयं महादेव ने मार्कण्डेय की मृत्यु को टालकर अमरता का वरदान दिया था तो फिर आप में वह अविश्वास का भाव क्यों?
आपके मन में यह चिन्तन जरूर आता होगा, विश्वास-भक्ति-समर्पण सब ठीक है पर यह कार्य तो मुझे करना है, मेहनत तो स्वयं मुझे करनी है, कष्ट तो मुझे होगा, भोगना भी मुझे है, सुनना भी मुझे है।
जब आप गुरू की शरण में आ गये हो तो आपकी विजय तो तय है, पर वो प्राप्त केवल कर्म और तप के माध्यम से होगा कर्म इसलिये अनिवार्य है क्योंकि इसी पथ पर चल आप अपने भविष्य पर पहुंचोगे और तप इसलिये कि अपनी सिद्धि , अपने ऐश्वर्य के योग्य तभी होंगे जब आपने तप किया होगा।
आप अतीत को नहीं बदल सकते चाहे कितने प्रयत्न कर लो, आपके पास भविष्य को बदलने का सामर्थ है और वह तभी सम्भव है जब आप वर्तमान में कर्मशील हो।
जीवन में तो हजारों कष्ट आयेंगे जब कोई भी कार्य करने लगोगे तो अवरोध आयेगा पर आपने अपना विश्वास नहीं खोना है वह तभी सम्भव है जब आप अपने गुरू पर, अपने ईश्वर पर पूर्णता विश्वास रखोगे कि वे आपकी नैया को पार लगायेंगे।
इस 10-11-12-13 मई को सर्व विजयश्री नृसिंह शक्ति अष्ट लक्ष्मी साधना महोत्सव, कैलाश नारायण धाम-दिल्ली में सम्मिलित होकर आप अपनी उस चेतना को उस विश्वास को पुन: जीवित करें।
आपका अपना
विनीत श्रीमाली
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